Published On:Monday, December 9, 2013
Posted by NJFI media
PreviousNext
यहां पत्रकारों से बातचीत में सोमवार को हजारे ने कहा कि कांग्रेस को चार राज्यों में मिली भारी पराजय का एक बड़ा कारण जन लोकपाल विधेयक भी रहा जिसे वह संसद में पारित कराने में नाकाम रही। धोखा देने वाली कांग्रेस को जनता ने समुचित जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सांप्रदायिक हिंसा विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए वादा कर सकते हैं तो बहुप्रतीक्षित भ्रष्टाचार निरोधी कानून के लिए वह ऐसा ही वादा क्यों नहीं कर सकते हैं।
पढ़ें: एक दिन दिल्ली का सीएम बनेगा केजरीवाल
2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में किए गएआमरण अनशन को याद करते हुए हजारे ने कहा कि सोनिया गांधी ने उन्हें पत्र लिखकर कहा था कि सरकार जन लोकपाल विधेयक लाने को तैयार है। उन्होंने अनशन समाप्त करने के लिए निवेदन किया था। मैंने उन पर विश्वास किया और अपना अनशन समाप्त कर दिया था। मैं नहीं जानता था कि संप्रग सरकार जनता और मेरे साथ विश्वासघात करेगी।
हजारे ने पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि मैंने देशवासियों से वादा किया था कि यदि सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित नहीं करती है तो संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन से रामलीला मैदान में अनशन पर बैठूंगा, लेकिन हाल में ही हुई एक सर्जरी के चलते मैं ठीक नहीं हूं। डॉक्टरों ने मुझे सावधानी बरतने के लिए कहा है। मैं दस दिसंबर से रामलीला मैदान की जगह अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन करुंगा। अनशन हाल में ही गठित संगठन जनतंत्र मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया जाएगा।
हजारे ने कहा कि उनका अनशन संसद में मजबूत जनलोकपाल के पारित होने तक जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से विधेयक को लेकर अहिंसात्मक तरीके से सरकार पर दबाव बनाने का आह्वान किया। गौरतलब है कि अगस्त, 2011 में जन लोकपाल को लेकर हजारे 12 दिन आमरण अनशन पर बैठे थे। जनदबाव में केंद्र ने लोकपाल विधेयक को लोकसभा में पारित कर दिया था, लेकिन राज्यसभा में पारित होना बाकी है।
कल से आमरण अनशन पर बैठेंगे अन्ना
रालेगण सिद्धि (महाराष्ट्र)। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे जन लोकपाल विधेयक पारित कराने की मांग को लेकर मंगलवार से एक बार फिर आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर विश्वासघात करने और अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया है।यहां पत्रकारों से बातचीत में सोमवार को हजारे ने कहा कि कांग्रेस को चार राज्यों में मिली भारी पराजय का एक बड़ा कारण जन लोकपाल विधेयक भी रहा जिसे वह संसद में पारित कराने में नाकाम रही। धोखा देने वाली कांग्रेस को जनता ने समुचित जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सांप्रदायिक हिंसा विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए वादा कर सकते हैं तो बहुप्रतीक्षित भ्रष्टाचार निरोधी कानून के लिए वह ऐसा ही वादा क्यों नहीं कर सकते हैं।
पढ़ें: एक दिन दिल्ली का सीएम बनेगा केजरीवाल
2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में किए गएआमरण अनशन को याद करते हुए हजारे ने कहा कि सोनिया गांधी ने उन्हें पत्र लिखकर कहा था कि सरकार जन लोकपाल विधेयक लाने को तैयार है। उन्होंने अनशन समाप्त करने के लिए निवेदन किया था। मैंने उन पर विश्वास किया और अपना अनशन समाप्त कर दिया था। मैं नहीं जानता था कि संप्रग सरकार जनता और मेरे साथ विश्वासघात करेगी।
हजारे ने पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि मैंने देशवासियों से वादा किया था कि यदि सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित नहीं करती है तो संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन से रामलीला मैदान में अनशन पर बैठूंगा, लेकिन हाल में ही हुई एक सर्जरी के चलते मैं ठीक नहीं हूं। डॉक्टरों ने मुझे सावधानी बरतने के लिए कहा है। मैं दस दिसंबर से रामलीला मैदान की जगह अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन करुंगा। अनशन हाल में ही गठित संगठन जनतंत्र मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया जाएगा।
हजारे ने कहा कि उनका अनशन संसद में मजबूत जनलोकपाल के पारित होने तक जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से विधेयक को लेकर अहिंसात्मक तरीके से सरकार पर दबाव बनाने का आह्वान किया। गौरतलब है कि अगस्त, 2011 में जन लोकपाल को लेकर हजारे 12 दिन आमरण अनशन पर बैठे थे। जनदबाव में केंद्र ने लोकपाल विधेयक को लोकसभा में पारित कर दिया था, लेकिन राज्यसभा में पारित होना बाकी है।


