Published On:Wednesday, January 22, 2014
Posted by NJFI media
क्रान्ति व आजादी के महानायक देशप्रेम व गरिमा की मूर्ती नेताजी सुभाषचंद्र बोस
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूॅंगा। की बात को जन जन के हदय में स्थापित करने वाले माॅं भारती के सपूत नेताजी बोस ने अपनी बुद्धि चातुर्य शौर्य, समझ और विवेक वादिता से समूचे विश्व में ख्याति पाई। हिटलर तक नेताजी बोस को सानिध्य चाहता कि विश्व पर अपना एक छत्र राज्य स्थापित कर सके, किन्तु नेताजी बोस ने स्पष्ट इन्कार किया। नेजाती स्वदशी प्रेमी व आजादी के दीवाने थे। उनका बुद्धिचातुर्य व सैन्य प्रबंधन अपने आप में अनूठा था। जापान से नेताजी के प्रगाढ संबंध थे, किन्तु साम्यवादी भी नेताजी के कायल थे। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद नताजी बोस युद्ध अपराधी घाषित किए गए उन्हें जिंदा या मुर्दा प्राप्त करना चाहते थे अंगे्रज। भारत आजाद हुआ और अन्र्तराष्टीय संधि से बंधा हुआ था। नेताजी बोस प्लेन दुर्घटना में मारे गए। प्रचारित हुआ सत्य तो दूसरा ही था, जो साम्यवादी नेताजी के आलोचक थे उन्होंने ही उन्हें सुरक्षा प्रदान की। स्टालीन ने नेताजी बोस को संरक्षित रखा। यह विजय नेताजी के विशेष चरित्र की देन ही थी। उन्होंने अपने प्रपत्र अंगे्रेजी में प्रस्तुत किए थे तब स्टालीन ने उन्हं अस्वीकार किया व कहा कि आपके प्रपत्र आपकी देशभाषा या उसी भाषा में हो विजय लक्ष्मी पण्डित ने हस्तलिखित हिन्दी भाषा में जारी किए थे जिन्हे स्टालीन ने स्वीकारे थे। बाद में स्टालीन ने विजय लक्ष्मी पण्डित को कहा था कि वे भारत सरकार से कहे की नेताजी बोस को रूस से लाया जाये, किन्तु भारत सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया व स्टालीन ने भी हाथ खच, संधि की वजह से।
स्व. पण्डित नेहरू के दिवंगत होने पर नेताजी बोस स्वंय आये थे और भारत के प्रधानमंत्री नेहरू को पुष्पाजंलि दी थी।
अब नेताजी बोस जिंदा नहीं है यह शाश्वत सत्य है। यदि नेताजी बोस जिंदा होते तो वर्तमान के समय आ जाते और आजादी एवं गणतंत्र को मजाक बनाने वाले मक्कार नेताओं एवं दलों की कू्ररता ही समाप्त कर देते। आज के नेता एंव दल तो मक्कार झूठ व घिनौनेपन की किताबे है। नेताजी बोस जैसा साहसी देशप्रेमी बहादूर, बुद्धिचातुर्य व विवेकीवादी नेता, भारत में शायद ही अवतारित हो। सच तो यह है कि देश को अब गांधी, नेताजी बोस सरकार पटेल और नेहरू जैसा इन्द्रिरा जैसी नेता थी। मोदी राहुल व अन्य नेता नहीं नेताजी बोस का आज प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता है किन्तु देश का जनता का दुर्भाग्य है कि मादी, राहुल व अन्य घिनौने चेहरो से जनता आत्मिक रूप से घृृणा करती है। देश के सभी नेता व दल, अहंकारी, पूर्वाग्रही सत्ताखोर, धनखोर, देश, समाज व्यवस्था भजक है। उन्हे, देश जनता सुव्यवस्था से कोई सरोकार नहीं है। दश को नेताजी बोस जैसा नेता चाहिए न कि मोदी, राहुल व अन्यों जैसा देश की जनता नेताजी बोस को आत्मिक श्रृद्धाजंलि व पुष्पाजंलि अर्पित करती हैं।
स्व. पण्डित नेहरू के दिवंगत होने पर नेताजी बोस स्वंय आये थे और भारत के प्रधानमंत्री नेहरू को पुष्पाजंलि दी थी।
अब नेताजी बोस जिंदा नहीं है यह शाश्वत सत्य है। यदि नेताजी बोस जिंदा होते तो वर्तमान के समय आ जाते और आजादी एवं गणतंत्र को मजाक बनाने वाले मक्कार नेताओं एवं दलों की कू्ररता ही समाप्त कर देते। आज के नेता एंव दल तो मक्कार झूठ व घिनौनेपन की किताबे है। नेताजी बोस जैसा साहसी देशप्रेमी बहादूर, बुद्धिचातुर्य व विवेकीवादी नेता, भारत में शायद ही अवतारित हो। सच तो यह है कि देश को अब गांधी, नेताजी बोस सरकार पटेल और नेहरू जैसा इन्द्रिरा जैसी नेता थी। मोदी राहुल व अन्य नेता नहीं नेताजी बोस का आज प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता है किन्तु देश का जनता का दुर्भाग्य है कि मादी, राहुल व अन्य घिनौने चेहरो से जनता आत्मिक रूप से घृृणा करती है। देश के सभी नेता व दल, अहंकारी, पूर्वाग्रही सत्ताखोर, धनखोर, देश, समाज व्यवस्था भजक है। उन्हे, देश जनता सुव्यवस्था से कोई सरोकार नहीं है। दश को नेताजी बोस जैसा नेता चाहिए न कि मोदी, राहुल व अन्यों जैसा देश की जनता नेताजी बोस को आत्मिक श्रृद्धाजंलि व पुष्पाजंलि अर्पित करती हैं।


