Published On:Sunday, January 19, 2014
Posted by NJFI media
पानी के किरदार, सिद्धाभक्ति की मूर्ति, महायोगी लोकउद्धारक डाॅ. बुराहनुद्दीन साहब अनंत यात्रा पर
सेवा एवं शान्तिदूत, पानी के किरदार के प्रतीक मानवीय मूल्यों सर्वसम्मान देशभक्ति श्रमपूजक कर्मवादी आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर समाज सेवा व सुधार के स्वंय सक्रिय आंदोलन तथा ईश्वर के सैनिक तथा भौतिक जगत के महा मानव डाॅ. सैयदना बुरहानुदीन सिद्धाभक्ति रत ही हमेशा रहे और भक्ति में डूबे रहकर, भौतिक जगत से अन्र्तध्यान होकर अनंत यात्रा पर चले गए। उनका पार्थिव शरीर खाके सुपर्द किया गया। उनका मजार भी अब अपने आप में एक सिद्ध तीर्थ व इबादत स्थल ही होगा। 102 वर्षीय डाॅु. सैयदना बुरहानुदीन शतायु होकर अन्र्तध्यान हुए। वे 52 धर्मगुरू थे। बोहरा समाज को आत्म सम्मान कर्मवादिता सहयोग, त्याग,प्रेम सर्वसम्मान देशवादिता, सामाजिकता की जमीन पर खडा किया, समाज मे समतावादी व्यवस्थाएं स्थापित की प्रत्येक व्यक्ति को कट्टर आध्यात्मिक एवं नक इन्सान बनाने की पहल की। उनकी सिद्धाभक्ति अपन आप में अनूठी थी। उनकी निगाहे व सिर, ईश्वर के सजदे में ण्ुका रहता था। उनको ईश्वरीय आशीष प्राप्त था जो अनेक स्थानों पर प्रत्यक्ष दिखा। मौत उज्जैन में थे, भीषण गर्मी थी, भंयकर पेय जल संकट था, पानी की त्राहि त्राहि मची हुई थी। आराधना स्थलों में ईश्वर की आराधना की जा रही थी। ऐसे समय में पानी के किरदार डाॅ. सैयदना ने किए। गंभीर डेम एक ही दिन में वर्षा से लबालब भराया। यह परिकल्पना या कहानी नहीं है जो यथार्थ में घटित हुआ था वही प्रस्तुत है। डाॅ. सैयदना पानी के किरदार थे यह बात सिद्ध हुई हैं।
सिद्धाभक्ति साधक व भक्त को महायोगी महा मानव एवं महा उद्धारक बनादेती है, डाॅ. सैयदना साहब साक्षात प्रमाण है वे शारीरिक रूप में तो संसार में नहीं रहेगेकिन्तु भावनात्मक रूप में समाज व विश्व में हमेशा विद्यमान रहेगे। मुंबई मंडी बाजार का कब्रिस्तान उनके महाविश्राम स्थल हो गया हैं। अब वह कब्रिस्तान नहीं बल्कि एक नया आराधना स्थल भी हो गया है। हम सब सच्चे देशभक्त और नेक इन्सान बने,यही हमसे अपक्षा रखते थे मौला। हम सब उनकी अपेक्षाओं पूर्ण करे मौला को देश की और से आत्मिक श्रृद्धासुमन अर्पित।


