Published On:Friday, January 17, 2014
Posted by NJFI media
सी.आय.ए के जाल देश में
उज्जैन। समूचे देश में सीआयए का जाल फैला हुआ है सीआयए के दलालों की पहचान भी बहुत मुश्किल है। देश में राजनैतिक, आर्थिक, अस्थिरता महंगाई, सत्ता तख्ते पलट के खेला, आंदोलन, छोटे-छोटे राज्यों के गठन प्रक्रिया ईमान खोता और बचता आदमी, कारपोरेट जगत, पॅंूजीपतियों उद्योग पतियों की आर्थिक कू्ररता धार्मिक उन्नाद सभी के पीछे सीआय का हाथ। देश की ई पी मीडिया पर भी सीआय ए का शिकंजा जो अपने आपको देश, समाज, इन्सान, व्यवस्था आध्यात्म, सुसंस्कार व लोक कल्याण के ठेकेदार जताते है उनकी स्थिति विचित्र है, उनके आकाओं के रिमोट तो सीआयए के हाथों में हैं। देश के नेताशाह, नौकरशाह पॅंूजीशाह आध्यात्मिक चेहरे व संगठन भी सीआयए के हाथों की प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष कठपुतली है। सरकारे शासन व प्रशासन को सीआए के हर आदेश का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से पालन करना होता ही है। देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को सभी का संज्ञान भी होता है, किन्तु गोपनीयता की शपथ के कारण वे चेहरों का खुलासा नहीं कर पाते है। स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी ने ऐसा किया था, किन्तु उनके बाद किसी भी प्रधानंत्री ने ऐसा साहस नहीं जताया।
देश की जनता सीआयए तथा एजेन्टस दलों का चरित्र, व्यवहार नीति, नीयत समझने में अक्षम ही है। लोभतंत्र के कारण, जनता भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में सीआयए के लक्ष्यों को मूर्तरूप देने में सलग्न हो जाती हैं। हर चेहरे पर नकाब और मुखौटे है। मुखौआ संस्कृति से भारत सरोबार हैं।


