Published On:Friday, January 17, 2014
Posted by NJFI media
संघ से जनता का अंह सवाल
उज्जैन। संघ स्वंय को भारत भारतीय व हिन्दु संस्कृति हिन्दुत्व सुसंस्कार, पावनता, सत्य, ईमान चरित्र व सुसंस्कारों का ठेकेदार मानता है देश विभूतियों पर अपनी मुहर लगाता है, राजनीति के नर्क को अपना आराध्य साध्य, साधन और लक्ष्य मानता है। हिन्दु धर्म का ठेकेदार स्वंय को जताता है क्या न्यासों के माध्यम से सरकारी भूमियों प्राप्त करना, उन पर सीमेंन्ट कांक्रिट के जंगल उगाना और भूमियों पर व्यवसायिक दुकाने चलाना, हिन्दुत्व, सुसंस्कार व सुसंस्कृति है। विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर परिसर में संघ ने भूमियाॅं हडपी उनका व्यवसायिक उपयोग हो संघ कारपारेट चलाकर भक्तों के वाहनों से धन वसूल रहा। ऐसा कुकृत्य भी हिन्दुत्व सेवा, संस्कार, सुसंस्कृति ही क्या। म.प्र. सरकार संघ व भाजपा से संबद्ध लोगों, साधू संतों के न्यासों को भूमियाॅं नाम मात्र मूल्य पर दे रही हैं। आसाराम जैसे कुकर्मी को मात्र 1 रू लीज पर भारी भरकम जमीन दे डाली, उसकी लीज अब निरस्त हुई हैं। संघ भी म.प्र. सरकार से प्राप्त भूमियाॅं तुरंत सरकार को लौटाये। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो उन भूमियों का व्यवसायिक तुरंत बंद करे। व्यवसायिक उपयोग खुले आम हो रहा है। संघ बताये को क्या जनता झूठबोल रही है, या संघ अपराध कर रहा है। माहन भागवत जन प्रश्न को गंभीरता से ले व उत्तर दे।
लोकतंत्र को बचाने व जिंदा रखने हेतु लोभतंत्र का खात्मा जरूरी है किन्तु संघ तो स्वंय में लोभतंत्र की दुकान और मकान ही बन गया है। बात बडी कडवी है किन्तु सत्य हैं।


