Published On:Friday, January 24, 2014
Posted by NJFI media
लोभ तंत्र, देश के साथ गद्धारी देश के सभी दल अपराधी है
हिन्दुस्तान निष्काम कर्म के सिद्धात में विश्वास करता हैं यही उसके विकास और सम्पन्नता का राज हैं देश के प्रत्येक व्यक्ति का कर्म प्रधान होना जरूरी हैं देश में प्रजातंत्र व गणतंत्र स्थापित है किन्तु राजनीति के पण्डे और गुण्ड उसे विकृत कर रहे है। सत्ता प्राप्ति हेतु हीन हथंकडे अपना रहे है। देश की 80 प्रतिशत वंचित वर्ग की लोभ के गर्त में धकेल कर उसे कर्महीन श्रमचोर, निठले बना रहे है। सभी दलों के चुनावी घोषणापत्र में लोभ लालच, श्रमचोर निठल्ले बना रहें। लोभ की आड में 80 प्रतिशत वंचितों से ही भारी भरकम करो की वसूली सरकारे कर रही है। उर्जा ईधन पर वेट कर 25 से 28 प्रतिशत तक वसूला जा रहा, जबकि उर्जाईधन पर वेट का शून्य ही होना चाहिए। केरल व गोआ सरकार ने ऐसा किया है। म.प्र. में किसानों, जनता घासलेट का उपयोग करने वाली झोपडियों से भी शिवराज सरकार वेट कर वसूल रही है। 80 प्रतिशत वंचितों का कहना साफ, हम भिखारी नहीं है। हमें लोभ लालच या भीख की जरूरत नहीं है। सभी सरकारे अपने अपने कर्तव्यों व राजधर्म का निर्वाहन ईमानदारी पूर्वक करें।
हम सरकारो को उनके दायित्व व कर्तव्यों का बोध भी करा दे। प्रत्येक व्यक्ति को सर्वप्रकार की शिक्षा व उपचार व्यवस्था निःशुल्क जीवनोपयोगी वस्तुए, युद्ध, सुलभता व न्यूनतम मूल्यों पर उपलब्ध है। सस्ती बिजली, अच्छी सडके, नाम मात्रदर पर पेयजल प्रत्येक परिवार को सैन्य परीक्षण प्राकृतिक सम्पदाओं का लाभ प्रत्येक परिवार व व्यक्ति को सिर छुपाने हेतु नाम मात्र मूल्य पर भूखण्ड हर हाथ का योग्यता व शारीरिक काम 60 वर्ष से उपर के नागरिकों को सम्मान जनक जीवनयात्रा पूर्ण करने की व्यवस्था, गरीबी उन्मूलन तथा समता मूलक स्वर्णिम समाजवादी, सुव्यवस्था, स्थापना, नैतिक, सुसंस्कारी व सच्चा आध्यात्मिक परिवेश सरकारों के दायित्व है। बी.पी.एल व अन्य व्यवस्थाएं भ्रामक है। देश में गरीबी की नहीं, अमीरी की सीमा रेखा बनना और उसकी इकाई चाहे व विभक्त हो या संयुक्त उसे इकाई बनाना, सुशासन सुव्यवस्था सरकारों के अनिवार्य कर्तव्य हैं।
किसी भी दल या गठबंधन की सरकारे, अपने कर्तव्यों के निर्वाहन की बजाय प्रजातंत्र गणतंत्र व लोकतंत्र को भीख तंत्र ही बना रही है। सभी दल स्वंय भिखारी है। पॅंूजीपतियों, उद्योगपतियों कालेधन कुबेरों, विदेशों कारपोरेट जगत से करोडों का चंदा उगाते है, 99 प्रतिशत खा जाते है प्राप्त चंदे पर आयकर तक नहीं देते, खूब घोटाले करते है, और फ्रि व रियायती सुविधाओं की चिल्लर 80 प्रतिशत वंचितों में फेकते है। वंचित उसे लूटने में व्यस्त हो जाते है और प्रजातंत्र लोकतंत्र व गणतंत्र के डकैत व भीख तंत्र बनाने वालों में अपना विश्वास कन्द्रित कर, उन्हें देश, लोकजन एवं मसीहा बनाते है।देश के 80 प्रतिशत वंचितों जागो, दल्लों लोकतंत्री षडयंत्रो को नाकाम करो, ऐसा करने पर ही आजादी लोकतत्रं व गणतंत्र अक्षुव्य रह पायेगा।


