Published On:Friday, January 24, 2014
Posted by NJFI media
देश के गणों की जनगीता
यह सर्वमान्य बात है कि देश व गणों के लिए तंत्र स्थापित किया गया है। तंत्र को गणों की भावनाओं के अनुरूप व आधारित होना अब तो तंत्र क्षेणों पर राज कर रहा है और उसे मूर्ख मान रहा हैं। तंत्र अब सेवा भाव में नहीं अपितु धन भाव मं है। कार्य पालिका, न्याय पालिका संविधान, विधान व्यवस्था भी गणों का तंत्र है जो अब सेवक नहीं नौकर बन कर काम कर रहा है। कोई अपने को चैकीदार जनता का नौकर उद्धारक कल्याणी व मसीहा मान रहा है, जब की सभी धन खोर, सत्ताखोर सत्ता स्वाद, सुविधा भोगी, ही बना हुआ है गणों की मेहनत पर मौज मार रहा है, हवा में उड रहा है विदेशों की यात्रा कर रहा है, अयाशी करते हुए, शानों शोकत का जीवन विभक्त रहा है और 100 प्रतिशत कंकाल होता जा रहा है तंत्र इतना भूख कहै की ठगा के कंकाल तक अपने उग्र में समा रहा है और दंभ भर रहा है। 80 प्रतिशत वंचित गण भी 20 प्रतिशत तानाशाह तंत्र की गुलामी कर रहे है। शाश्वत सत्य तो यह है कि गण और तंत्र दोनों ही विकृति की स्थिति में है। गणतंत्र मजदूरी तंत्र में बदल गया है। यही देश की विडम्बना है देश की जनता ही मुल्क की मालिक है। किन्तु 20 प्रतिशत चेहरों ने डकैती चोरी घपले व अन्य कुकृत्य कर 80 प्रतिशत जनता को वंचित एवं कंकाल स्थिति में ला दिया हं देशह के चंदा खोर सत्ताखोर नेता व दल 80 प्रतिशत जनता को 20 प्रतिशत सम्पन्नों की गुलाम बनाना चाहते है। राजनैतिक नाटक नौटंकीया उनके प्रयास व माध्यम है।
मोदी, राहुल, मुलायम सोनिया, नीतिश, ममता, एन्टोनी, लालू यादव व अन्य स्पष्ट जान ले की जनता क्या चाहती है। जो जनता चाहती है वही प्रस्तुत है गणतंत्र की 65 वी वर्षगाठ पर जनभावनाएं देश में प्रत्येक व्यक्ति को सर्वप्रकार की शिक्षा व उपचार व्यवस्था निःशुल्क मिले ऐसी व्यवस्था सरकार करे।
2. जीवनोपयोगी वस्तुए शुद्धता के साथ सुलभता सरलता व उचित मूल्यों पर उपलब्ध हो सस्ती बिजली पेय जल तथा सिर छुपान को सस्ते भूखण्ड परिवारों को उपलब्ध कराए जाये।
3. देश में समरसता, समता एवं वर्गविहीन वातावरण तथा गरीबी उन्मूलन भ्रष्टाचार घोटाले तथा धन की महत्ता समाप्ति हेतु देश में गरीबी की नहीं अमीरी की सीमा रेखा तय की जाये। परिवार को उसकी इकाई बनाया जाये, चाहे वह संयुक्त हो या विभक्त। अतिशेष चल अचल संपत्ति, राजसात की जाये समता मूलक सर्वसम्मानक स्वर्णिम समाजवादी व्यवस्था स्थापित की जाए।
4. राजनैतिक शुचिता सामजस्य एवं कर्तव्य परायण सरकारे हेतु दलों या गठबंधन की सरकार नहीं अपतिु दलीय आनुपातिक पद्धतिमान से केन्द्र व राज्यों में लोकप्रिय सरकार गठित हो।
5. देश को कारपोरेट इन्डिया या बांड इन्डिया बनाने की बजाय, विश्व गुरू भारत व महाशक्ति बनाने की पहल व व्यवस्था हो।
6. विभिन्नताओं को विशेषता बनाने हेतु छोटे राज्यों की बजाय अंचलीय शासन पद्धति भी संवैधानिक व्यवस्था की जाये।
7. देश का नया संविधान बनाया जाये। अपराधों पर नियत्रंण हेतु मृत्युदण्ड अंभगंभ दण्ड का प्रावधान किया जाये।
8. हर व्यक्ति को भीख व सुविधाओं की बजाय, योग्यता एवं क्षमतानुसार काम दिया जाए।
9. निशक्त जनो, वृद्धां की विशेष देख रेख हेतु ब्लाक स्तर तक वृद्धा व निराश्रित आश्रम खोले जाए।
10. सभी साक्षर सुसंस्कारी व विवेकी बने एसी शिक्षा पद्धति व नीति बनाई जाये प्रत्येक व्यक्ति का विवेकी होना जरूरी हैं।


