Published On:Tuesday, January 7, 2014
Posted by NJFI media
मुरादाबाद के गांवों में घुसी बाघिन
मुरादाबाद। अमरोहा और मुरादाबाद में कोहराम मचाने के बाद बाघिन मंगलवार रात फिर मुरादाबाद में घूमती रही। बाघिन के दो और गांव के आसपास घूमने से दहशत का माहौल पैदा हो गया। दिल्ली हाइवे के इन गांवों के आसपास पुलिस भी बाघिन की लोकेशन ढूंढती रही। इस बीच मुरादाबाद के चंगेरी गांव में कांबिंग भी चली। जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में अलर्ट कर दिया गया है। चंगेरी व मोढ़ातैया में दहशत फैलाने वाली बाघिन सोमवार सुबह भैसोड़ा के खेतों में किसानों को दिखाई दी।
खेतों पर जा रहे किसानों ने जब उसे देखा तो उल्टे पांव ही गांव लौट आए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाघिन को तलाशने की कोशिश की, लेकिन उसकी लोकेशन नहीं मिली। सोमवार को 11 बजे लोधीपुर में आइएफटीएम यूनिवर्सिटी के पीछे खेतों में भी बाघिन को देखा गया। एकत्र होकर ग्रामीण खेतों पर पहुंचे, तो वहां बाघिन के बजाय पंजों के निशान मिले। जिन्हें वनविभाग के अधिकारी पुराने निशान बता रहे हैं।
पढ़ें : दहशत: जिम कार्बेट पार्क से भटक कर आए बाघ की घेराबंदी
पुलिस दिनभर दिल्ली हाइवे पर गश्त करती रही। बीती रात साढ़े दस बजे बाघिन चंगेरी गांव से मोढ़ा तैया गांव की ओर निकल गई। खेतों में ग्रामीण महेंद्र सिंह, खजान सिंह और
खचेड़ू ने जब टार्च की रोशनी की तो बाघिन दिखाई देने पर होश उड़ गए। ग्रामीण वहां से भागे तो सीधे गांव में ही आकर रुके। गांव के लोगों ने आधी रात तक मशाल जलाकर उसे ढूंढा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। चंगेरी गांव में दोनों पिंजड़े लगे हैं, लेकिन बाघिन लौटकर नहीं आई।
वन संरक्षक कमलेश कुमार ने चंगेरी गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधीनस्थों को निर्देशित किया। इसी क्रम में आसपास के जनपदों के डीएफओ को सतर्क करते हुए बार्डर की निगाहबानी तेज कर दी गई है। अब टीम बाघिन की गतिविधि का खाका खींचने में जुटी है। वन संरक्षक के मुताबिक बाघ अब लौट रही है। उसकी लोकेशन चंगेरी गांव के तीन से चार किलोमीटर उत्तर दिशा मेमिल रही है, जबकि पंजे की जांच के बाद उसकी उम्र तीन से चार साल मानी जा रही है।
खेतों पर जा रहे किसानों ने जब उसे देखा तो उल्टे पांव ही गांव लौट आए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाघिन को तलाशने की कोशिश की, लेकिन उसकी लोकेशन नहीं मिली। सोमवार को 11 बजे लोधीपुर में आइएफटीएम यूनिवर्सिटी के पीछे खेतों में भी बाघिन को देखा गया। एकत्र होकर ग्रामीण खेतों पर पहुंचे, तो वहां बाघिन के बजाय पंजों के निशान मिले। जिन्हें वनविभाग के अधिकारी पुराने निशान बता रहे हैं।
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पुलिस दिनभर दिल्ली हाइवे पर गश्त करती रही। बीती रात साढ़े दस बजे बाघिन चंगेरी गांव से मोढ़ा तैया गांव की ओर निकल गई। खेतों में ग्रामीण महेंद्र सिंह, खजान सिंह और
खचेड़ू ने जब टार्च की रोशनी की तो बाघिन दिखाई देने पर होश उड़ गए। ग्रामीण वहां से भागे तो सीधे गांव में ही आकर रुके। गांव के लोगों ने आधी रात तक मशाल जलाकर उसे ढूंढा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। चंगेरी गांव में दोनों पिंजड़े लगे हैं, लेकिन बाघिन लौटकर नहीं आई।
वन संरक्षक कमलेश कुमार ने चंगेरी गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधीनस्थों को निर्देशित किया। इसी क्रम में आसपास के जनपदों के डीएफओ को सतर्क करते हुए बार्डर की निगाहबानी तेज कर दी गई है। अब टीम बाघिन की गतिविधि का खाका खींचने में जुटी है। वन संरक्षक के मुताबिक बाघ अब लौट रही है। उसकी लोकेशन चंगेरी गांव के तीन से चार किलोमीटर उत्तर दिशा मेमिल रही है, जबकि पंजे की जांच के बाद उसकी उम्र तीन से चार साल मानी जा रही है।


