Published On:Tuesday, January 21, 2014
Posted by NJFI media
टूजी प्रकरण: न्यायालय ने सीबीआई से मांगा जवाब
उच्चतम न्यायालय न टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन प्रकरण में अभियुक्तों के खिलाफ अभियोग निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर मंगलवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जवाब-तलब किया। इस मामले में निचली अदालत में पूर्व संचार मंत्री ए राजा और कार्पोरेट जगत के कई मुख्य कार्यकारियों के खिलाफ मुकदमा अंतिम चरण से पहले के दौर में पहुंच गया है।
आरोपियों का तर्क है कि निचली अदलात में 152 गवाहों के बयान दर्ज करने में लगे समय के मद्देनजर अभियोग निर्धारित करने की कार्यवाही को चुनौती देने में तीन साल के विलंब के लिये उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय में उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत के आदेश के कारण रोक लगी थी।
न्यायमूर्ति एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन ने गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस को भी नोटिस जारी किया है। इसी संगठन की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश देने के साथ ही दो फरवरी, 2012 को 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द कर दिये थे।
न्यायालय ने केन्द्र और दूरसंचार नियामक प्राधिकरण सहित सभी पक्षों को अभियुक्तों की याचिका पर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सभी अभियुक्तों ने दलील दी है कि उनके खिलाफ 22 अक्टूबर, 2011 को अभियोग निर्धारण की कार्यवाही पूरी होने के तुरंत बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
उच्च न्यायालय ने इस पर सीबीआई को नोटिस भी जारी किया था लेकिन इसके बाद जांच ब्यूरो ने अभियुक्तों की इस कार्यवाही को शीर्ष अदालत में चुनौती दे दी थी।

