Published On:Tuesday, January 21, 2014
Posted by NJFI media
मीडिया घराने के अधिकारी ने "आजम" से क्या मांगा?
लखनऊ। विधायकों के विदेश के स्टडी टूर से वापस लौटे दल के नेता व संसदीय कार्यमंत्री आजम खां मीडिया से खासे खफा नजर आए। उन्होंने कहा कि एक मीडिया घराने के बड़े अधिकारी की मांग पूरी करने से इंकार कर दिए जाने का नतीजा है कि स्टडी टूर को मुजफ्फ्फनगर दंगा से जोड़ दिया गया।
पहले भी हुए कई भ्रमण
विदेशी दौरे से वापस आने के कुछ ही देर बाद अपने सरकारी आवास पर दल के सभी सदस्यों के साथ पत्रकारों से चर्चा करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भारत कॉमन वेल्थ व यूएनए का सदस्य है। ऎसे में एक दूसरे देश की कार्य संस्कृति देखने के लिए दलों का भ्रमण होता रहता है।
वर्ष 1998, 1999, 2000, 2001, 2002 में विधानसभा अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी और वर्ष 2004 में विधानसभा अध्यक्ष माताप्रसाद पांडे अपने साथ जनप्रतिनिधियों के दल को साथ ले गए थे। उनके दल में अन्य सदस्यों के साथ ही दो महिला सदस्य शामिल थीं। इसके बाद भी उनके दौरे पर कुछ मीडिया हाउस ने घटिया भाषा का इस्तेमाल किया। अय्याशी जैसे शब्द प्रयोग में लाए गए, जिन्हें सुनकर देश के लोग अचंभित हैं।
उन्होंने कहा कि दल ने विविध देशों में जाकर वहां की काय üसंस्कृति व विकास को देखा। उनके दल का पीछा दिल्ली से ही किया गया व इस तरह से धक्का मुक्की की गई कि उनकी नाक से खून भी निकल आया। जिस मुजफ्फरनगर दंगा के पीडितों को लेकर यह बखेड़ा किया गया वास्तव में ऎसे मीडिया हाउस की उन परेशान हाल लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है ,बल्कि यह मुस्लिमों को ही आपस में बांटने का गंदा खेल खेल रहे हैं जो देश के हित में नहीं है।
मुस्लिम था, इसलिए विरोध
आजम ने कहा कि फासिस्ट ताकतें एक मुस्लिम मंत्री की तरक्की नहीं देखना चाहती हैं, अन्यथा अब तक कई दलों ने दौरे किए,लेकिन कोई विरोध नहीं हुआ, लेकिन इस बार दल का अगुवा एक मुस्लिम था इस नाते विरोध किया गया।
मुझसे की डिमांड, मैंने मना किया
दिल्ली में एक मीडिया घराने के बड़े साहब उनसे मिले थे और कुछ डिमांड की थी, इस बात का खुलासा करते हुए आजम ने कहा कि मैंने डिमांड मांगने से इंकार कर दियाा, इस कारण भी कुछ विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि जिस महंगे होटल में दल के सदस्यों की बात कही जा रही है वह व्यवस्था एम्बेसी ने की थी और उन्होंने विदेश में शॉपिंग नहीं की थी बल्कि वह साहित्य था जो विदेशी प्रतिनिधियों से वार्ता के बाद दिया गया था।
उन्होंने कहा कि प्रदेश शासन ने मुजफ्फरनगर के दंगा पीडितों के लिए हरसंभव मदद की है और दोषियों को सजा देने में भी पीछे नहीं हटेगी, लेकिन सरकार के इस उजले पक्ष को दिखाने के बजाए मनगढंत कहानी बनाई जा रही हैं।g

