Published On:Saturday, January 25, 2014
Posted by NJFI media
सावधान! हिम एवं तिमिर युग की दस्तक
उज्जैन। मानवीय कुकृत्यों व कू्ररता की सजा भी प्रकृति दे रही है। सामूहिक मृत्यु अब नियति चक्र का दैविक अभिसमय बन गया ह। म.प्र. के उज्जैन जिले के गांव नागदा तराना से लेकर कश्मीर शिमला व न्यूयार्क तक बर्फ की चादर नजर आ रही है लगता है पृथ्वी अब हिमयुग व कल्प की हिरासत मं जा रही हैं। भूकम्प की भरमार, ज्वाला मुखी की सक्रियता जल प्रलय, कोहरा की कू्ररता और धुंध का फैलना साम्राराज्य तिमिर युग की स्मृति करा रहा हैं। अब तो सूर्य भी हडताल करने पर अमादा है, धूप को तरस रहा है इन्सान और फसले। यदि स्थिति हमारी नियति के प्रति कू्ररता का प्रमाण है। प्रकृति के साथ छेडछाड अवैध, उत्खन्न, भूगर्भ परीक्षण, अवैज्ञानिक निमार्ण और विकास पृथ्वी सतह को 5 किमी तक कचरे से आच्छादित करना, ओझोन परम को छिद्रमयी बनाना भूगर्भ का कू्ररता पूर्वक दोहन करना हमारी कुकृत्य है। पर्यावरण असन्तुलन व प्रकृति के प्रतिकू्ररता क कारण ही सिंधु घाटी सभ्यता नष्ट हुई थी। 21 वी सदी में हमारी तथाकथित आधुनिक सभ्यता को जलप्रलय, भूकम्प, हिमपात, असामाजिक ओलावृष्टि व वर्षा निगल रही है। पृथ्वी सक्रामंकता की भी शिकार है। पृथ्वी की आयु करोडों वर्ष है। वह समाप्त नहीं होगी, उसका रूपांतर होगा। जहा पर्वत व हिमखण्ड है वह मैदान हो सकते, समुद्र विस्तार हो सकता हैं समुद्र को भी धरती की जरूरी है आकाश में समुद्र असित्वमान नहीं हो। हम धरती के कपूत बेटे है उस पर कू्ररता बरपा रहे है। फिर भी धरती कृष्णत्व की सरचना है माॅं स्वरूपा है। उॅंचे उॅचे पवर्तो, गहरे समुद्रो हम प्राणियों व हम सब का बाझ उठाती है, हमारी कू्ररता, सहन करती है और हमसे प्यार करती है, स्नेह रखती है। इसी कारण ये धरती, धरती माॅं मानती जाती हैं।


