Published On:Sunday, January 19, 2014
Posted by NJFI media
तिरंगे में लिपटे डाॅ. सैयदना को अंतिम बिदाई दी
उज्जैन। बोहरा समाज के 52 वे धर्मगुरू शतायु होकर भौतिक संसार से अन्र्तध्यान हुए। डाॅ. सैयदना सच्चे देशभक्त एवं समाज सेवक थे। 95 वर्ष पूर्व जो संकल्प लिया था उसे पूर्ण किया। डाॅ. सयदना की अंतिम यात्रा पर भी उन्होंने तिरंगे को ओढे रखा, यह बात भी अपने आप मं अनूठी ही है। डाॅ. सयदना पानी के किरदार महान देश व समाज सेवी, नव निर्माण के नायक एवं सिद्धाभक्ति की साक्षात मूर्ति थे। ईश्वर के सैनिकों की मौत कभी नहीं होती वे स्वंय ही भौतिक संसार से अन्र्तध्यान होते है और आत्मिक रूप से हमारे बीच विद्यमान है डाॅ. सैयदना आदमी, समाज व देशह को सुखी सम्पन्नता और एकता के सूत्र में बांधे रखना चाहते और वही कार्य किया। अपनी अंतिम यात्रा पर भी तिरंगा ओढा जो उनकी राष्टीय प्रियता और देश सम्मान का प्रतीक है। मौला ने सबकुछ दिया और हमारे बीच से कूच करते हुए यही कहा सुखी एवं खुश रहो, सच्चे देशप्रेमी और नेक इन्सान बनो।


