Published On:Monday, February 17, 2014
Posted by NJFI media
लोकसभा चुनाव 2014 पर सीआयए की गिद्ध दृष्टी, नेताओं से सम्पर्क
उज्जैन। अमेरिका स्वंय को विश्व का चैधरी मानता है और सीआयए के माध्यम से कम्पित रखते हुए, अपने आथिक एवं राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध करता है। एशिया की महाआर्थिक व जनशक्ति को अमेरिका एक व्यवहारिक मण्डी मानता है। भारत अनेकताओं में एकता वाला देश है जो अनेकताओं को विशेषताआं मं बदलने में सिद्ध हस्त ै। उसे भारत का उपरोक्त चरित्र पंसद नहीं। भारतीय सीआयए के एजेन्टस व दलालां द्वारा अनेक उथलपुथल करवाये जा रहे है, भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने हेतु अनेक प्रयास किए जा रहे है। साम्प्रदायिक तनाव और ंिहंसा, छोटे छोटे राज्यों के आदंोलन नाजीवादी ताकतों व अन्य संस्थाओं का भारी आर्थिक मदद, पाक भारत के बीच घमासान युद्ध, भारत की सत्ता पर अपने चहेतों का काबिज करना व अनेक गतिविधियाॅं है।
लोकसभा चुनाव 2014 पर उसकी गिद्ध दृष्टी है अनेक भारतीय नेताओं से सम्पर्क अभियान चलारया जा रहा है। मेन्सी मोदी से मिली, बाघेला से भंट की, अब ममता से दूसरी बार मिलेगी, सोनिया राहुल, मोहन भागवत व अन्यों से भी भंट हो सकती हैं अमेरिका इस भंट को सौजन्यी संवाद प्रक्रिया बता रहा हैं। अमेरिकी राजदूत ने भेंट को लेकर खुलासा किया किन्तु बातों में रहस्य भी उजागर कर बैठी। मोदी व अन्य नेताओं से अमेरिकी दलाल, अनेक बार भंट कर चुके है। यह बडी विचित्र बात है। अमेरिकी वामपंथी एवं समाजवादी नेताओं से कभी भेंट नहीं करते क्यों की वे जानते है कि वे उनकी हिरासत में नहीं आ सकते है। मोदी उसकी पहली पंसद है। सीआयए के दलालां का संज्ञान अडवाणी व देवगौडा को है। एनजेएफआई ने नेता द्वय से उनके नाम सार्वजनिक करने का अनुरोध भी किया।
समाजवादी वामपंथी पंथ निरपक्ष सभी दल युक्ति की राजनीति अपनाए। नाजीवादी पॅंूजीवादी तथा संघ के मुखौटे मोदी को आसमान दिखाये। कांगे्रस में समाजवादी ताकते है। अतः वह दोहरे व दोगले चरित्रवाली भाजपा से अच्छी ह। युक्ति की राजनीति से कांगे्रस पर नियंत्रण रहेगा। सप्रंग वाम मोर्चे की प्रतिछाया हैं देश की जनता नाजीवादियों, पॅंूजीवादी व कारपोरेट जगत के सत्ता अपहरण के षडयंत्र नाकाम करे व देश को सीआय ए के चुंगल से बचाये।


