Published On:Monday, February 10, 2014
Posted by NJFI media
देश की भूमियों का स्वामी देश है अन्य सभी तो मात्र पट्टेदार है
उज्जैन। जर व जमीन के चक्कर में देश व समाज व परिवार समाप्त हो रे है। हिंसा का वातावरण है वर्ग संघर्ष व परिवार संघर्ष चरम पर है। भूमाफियाओं देश की हत्या कर रहा है लोग भूदान की 23 लाख एकड जमीन हडप चुके है, उन्हं बेच रहे है मुआवजा खा रे है शमशानों व कब्रिस्तानों की भूमियाॅं तक हडपी जा रही है केन्द्र व राज्य सरकारे मूक दर्शक बनी हुई। देश के पॅंूजीपतियों ने ही भूमि का मान गिराया है। वास्तव में सभी भूमियों के स्वामी तो मूल आदिवासी है जो अब मूर्तहीन है उनकी जमीने राजाओं दबंगों ने हडपी है। इस बात का इतिहास साक्षी हैं।
जर और जमीन का महत्व समाप्त करने पर ही देश विकसित होगा। देश में अमीरी की सीमा रेखा तय है, परिवार चाहे वह विभक्त यो संयुक्त उसे इकाई बनाओ, अतिशेष नग्द व भूमि राजसात हो।
देश में विद्यमान सभी भूमि का स्वामी देश है। गरीबी और अमीर जिनके पास भूमि है वे मात्र पट्टेदार ही माने जाए। पट्टे की जमीन बेचना व खरीदना अपराध है ही। संसद सभी भूस्वामियों को पट्टेदार घोषित करने वाला कानून तुरंत बनाए। भूमािफयावाद हमेशा के लिए खत्म होगा, कोई भी व्यक्ति, परिवार, संस्था या कम्पनी, दशभूमि की स्वामी नहीं होगी। ये धरती हमारी माॅं है और उसकी खरीदी बिक्री जघन्न अपराध है।दश का व्यक्ति घिनौने अपराध से भी मुक्त हो जायेगा। जिनके पास अतिशेष भूमि होगी, वह स्वतः देश की संपत्ति होगी। जर व जमीन के संघर्ष ही समाप्त हो जायेगे।


