Published On:Monday, February 10, 2014
Posted by NJFI media
भाड़े की कलम, कैमरे, चेहरे, दल, नेता मंत्री, संत्री, नौकरशाह और व्यवस्था
उज्जैन। भारत में नया भाडावाद उचित होकर अपने चरम पर हैं देश का प्रत्येक व्यक्ति, नेता, मंत्री, अफसर, राजनैतिक दल, नौकरशाह, पॅंूजीपति, उद्योगपति, कारपोरेट जगत, समाज सेवक, समाजसेवी संस्थाएं, कन्द्र व राज्य सरकारे देश के साधू संत, विद्वान, महापण्डित, प्रत्येक बुद्धिजीवी, संस्कृति, सभ्यता, धर्म आध्यात्म, राष्टपति, हिन्दुत्व व आराधना के ठेकेदार स्वंय को उस कजारवादी व्यवस्था का महाधूर्त गिनोकी राजपुतिन बनाने में व्यस्त में है। सभी की चाहत की सब कुछ उनकी मन माफिक और इशारों पर हो। ग्रिनोकी ने सबको भाडे पर क्रय किया वह जारो का जारो का जार सुपर जार हो गया।
यही स्थिति भारत में पनपगयी है हर आदमी अपने आप में गो्रकी की बन रहा है। राजनेता, मंत्री, पॅंूजीपति, राजनैतिक दल, साधू,संत, विद्वान, बुद्धिजीवी, लेखक के विचारक, कवि, शायर, आराधना स्थलों के पुजारी, मुजावर मुल्ला मौलवी सभी व्यवस्थाएं, नौकरशाह हरकते जराकारे, सभा सुनने वाले।
सिद्धांक, कलम व कैमरे के सिपाही कलम कैमरे, पत्तियाॅं, भजन, गायक, कलाकार, दुल्हन व दुल्हे के श्रृगांर, बैड बाजे यहाॅं तक की माॅं की कोख तक भाडे पर मिल रही है। ये भाडावाद देश, समाज, इन्सान, व्यवस्था, सामाजिकता आध्याम,चरित्र, व्यवहार, नीति, नियत व आत्मा तक खा रहा हैं चिताएं भीडे की मोहताज हो गई है। सब कुछ भाडेती होता जा रहा ह।
देश की संवाद पालिका तो पूर्णरूपेण भाडे में ही खो गई है। भाडते कलम व कैमरे शैतान का देवता, महामानव, राष्टभक्त व लोक मसीहा नेतो सोश्यल मीडिया में भाडेती विचारको, चिन्तकों व लेखकों की भीड खडी कर दी हैं।
ये भाडावाद महापतन और गिरावट की चरम स्थिति है। हम सबकी विवेकहीनता और अति महत्वकाक्षां ही भाड़ावाद की जन्म दायी है जो भाडावाद से मुक्ति है, वही सच्चा इन्सान है। भाडावाद का दाह संस्कार अनिवार्य है।


