Published On:Thursday, February 20, 2014
Posted by NJFI media
प्रजातत्र, लोकतंत्र समाप्त, हुल्लड़ और हंगामा तंत्र देश में स्थापित
देश व लोकतंत्र के पावन मंदिर, लोकसभा राज्य सभा, उ.प्र. व आंध्र विधानसभा में राजनीति के पण्डों और गुण्डों ने जो अशोभनीय प्रदर्शन किया, उसके कारण, संसद और विधान सभाओं को शर्म आ गई, देश एवं प्रजातंत्र पर अमिट कालिख पुत गई। जनता राजनीति के पण्डों एवं गुण्डों के कुकृत्यों पर जनता शर्मिदा है किन्तु ये सफेद पोश संभ््रांात गुण्डो, कुकृत्यों को अपना शौर्य, गर्व, बहादुरी एवं राष्टीय कर्म व धर्म जता रहे है। शाश्वत की अब देश प्रजातंत्र व लोकतंत्र के लायक ही नहीं रहा सफेद हाथियों ने अपने उन्मादी कुकृत्यों से सब कुछ तहस नहस कर दिया। इस स्थिति का दोषी कौन, जनता को ही निर्णय करना होगा किसे पूंूजे, किसे सराहे और किसे गाली दे, सच तो यह है कि हत्यारे, कातिल और स्वदेशी आतंकी है। अपने अपने निजी, क्षेत्रीय दलीय राजनीति सत्तावादी एवं निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु प्रजातंत्र, लोकतंत्र विधान, संविधान संसद व विधान सभाआं के सम्मान व गौरख की कू्रर हत्याएं कर रहे है, जनकोष खा रहे है सभी सुविधाओं का भोग कर रहे और कू्रर हत्याए कर रहे है। सभी शातिर षडयंत्री व कू्रर हत्यारे है। संसद विधान सभाओं, संविधान व विधानों के शव पर खडे होकर स्वंय को सर्वश्रेष्ठ शव साधक सिद्ध कर रहे हैं। संसद और विधानसभाओं में हंगामे सुनियोजित एवं पूर्वाग्रही राजनैतिक षडयंत्र है। सभी सांसद, विधायक और सरकारे अपराधी है। सभी सत्ता सुन्दरी को अपनी रखैल बनाने हेतु जनता में चर्चित होने हतु घिनौने, शर्मनाक कुकृत्य करते है, सुव्यवस्थाओं को कुव्यवस्थाओं में बदलते है। ये सभी देश भक्त नहीं, खूखार सर्वभक्षक स्वदेशी आतंकी है। यह जनता का निर्णय है। इन आतंकियों को विदेशों से भी शव निर्देश व धन सहयोग मिलता है। इनके शरीर के रक्त का रंग लाल नहीं पूरा सफेद है। ये उडते भी है चलते भी है, बिलों में छुपते भी है और सब कुछ खा जाते हैं। इन स्वदेशी आतंकियों षडयंत्री, प्रायोजित आतंकवाद कठोरता से समाप्त करना अनिवार्य है। जनता मं शक्ति नही है। क्यों कि लोभवाद, सबसीडीवाद धनवाद, पदवाद व अन्य माध्यमों से जनता को अपना बंधुवा मजदूर बना चुके है, जनता का विश्वास उनके जयकारो, स्वागतों में ही सिमट गया है जन विवेक भी मक्कार धूर्ती ने अपने यहा गिरवी रख लिया है। स्वदेशी आतंकियों को जनता देवता तारण हार, मसीहा मान रही है। भ्रमित जनता भी उपरोक्त स्थिति हेतु उत्तरदायी है।
जनता और स्वदेशी आतंकियों का चरित्र एक समान हो गया है तो देश, समाज, संसद संविधान, विधान, तिरंगे, सुव्यवस्था, आदर्श गौरव की रक्षा कौन करे। हर समस्या, समाधान के साथ जन्म लेती है। समाधान भी तय है किन्तु मूर्तरूप देने वाले देशवीर की अनिवार्यता है सभी का विश्वास, वृहानभूला व शिखंडी बनने में है तो समाधान कैसे हो। समाधान पर विचार जरूरी है। विचार के बाद ही क्रांतिकारी है महामहिम संवैधानिक देश के सेनापति व न्यायाधिपति है वे ही समाधान को मूर्त रूप देने में सक्षम है 5 वर्षो के लिए आपातकाल लगाये, संसद व सभी विधानसभाएं भंग करे देश में राष्टपति शासन लागू हो सभी राजनैतिक दलों का पंजीयन निरस्त करे, वर्तमान संविधान को निरस्त कररे। सभी प्रकार की असमानता समाप्ति हेतु अमीरी की सीमा रेखा तय करे। जमीने व संपत्ति के मौलिक अधिकारों मं संसोधन करे कठोर दण्ड विधान हो, सर्व प्रकार की शिक्षा एवं उपचार की निःशुल्क व्यवस्था हो, जीवनोउपयोगी वस्तुएं काबिज दामों पर सुलभता से हो। प्रत्येक नागरिक को कर्मवीर और श्रमवीर बनाये जाने की व्यवस्था हो देश को कर्ज विहीन मनाया जाए उपरोक्त कार्य 5 वर्षो में पूर्ण करना है उसके बाद ही नए संविधान के अनुरूप ही संसद विधानसभाओं व अंचलीय परिषदों की गठन हो भावनात्मक एकता विदेशी ताकतों के षडयंत्र समात करे, व्यवस्थापिकी व्यय नाम मात्र का रकने हेतु राज्य प्रथा समाप्त करें। यही देश का धर्म हैं।
जनता और स्वदेशी आतंकियों का चरित्र एक समान हो गया है तो देश, समाज, संसद संविधान, विधान, तिरंगे, सुव्यवस्था, आदर्श गौरव की रक्षा कौन करे। हर समस्या, समाधान के साथ जन्म लेती है। समाधान भी तय है किन्तु मूर्तरूप देने वाले देशवीर की अनिवार्यता है सभी का विश्वास, वृहानभूला व शिखंडी बनने में है तो समाधान कैसे हो। समाधान पर विचार जरूरी है। विचार के बाद ही क्रांतिकारी है महामहिम संवैधानिक देश के सेनापति व न्यायाधिपति है वे ही समाधान को मूर्त रूप देने में सक्षम है 5 वर्षो के लिए आपातकाल लगाये, संसद व सभी विधानसभाएं भंग करे देश में राष्टपति शासन लागू हो सभी राजनैतिक दलों का पंजीयन निरस्त करे, वर्तमान संविधान को निरस्त कररे। सभी प्रकार की असमानता समाप्ति हेतु अमीरी की सीमा रेखा तय करे। जमीने व संपत्ति के मौलिक अधिकारों मं संसोधन करे कठोर दण्ड विधान हो, सर्व प्रकार की शिक्षा एवं उपचार की निःशुल्क व्यवस्था हो, जीवनोउपयोगी वस्तुएं काबिज दामों पर सुलभता से हो। प्रत्येक नागरिक को कर्मवीर और श्रमवीर बनाये जाने की व्यवस्था हो देश को कर्ज विहीन मनाया जाए उपरोक्त कार्य 5 वर्षो में पूर्ण करना है उसके बाद ही नए संविधान के अनुरूप ही संसद विधानसभाओं व अंचलीय परिषदों की गठन हो भावनात्मक एकता विदेशी ताकतों के षडयंत्र समात करे, व्यवस्थापिकी व्यय नाम मात्र का रकने हेतु राज्य प्रथा समाप्त करें। यही देश का धर्म हैं।


