Published On:Thursday, February 20, 2014
Posted by NJFI media
जय ललिता का अव्यवहारिक कदम
उज्जैन। राजीव गांधी हत्याकांड पूर्व नियोजित गहरी साजिश व षडयंत्र का परिणाम था इसमें अधिक चेहरे शरीक व भागीदार थे। संपूर्ण जांच, तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय नेतीन हत्यारों को ताउम्र कैद की सजा दी। अपराध मृत्युदण्ड योग्य ही था, किन्तु विलम्ब का लाभ अपराधियों को मिला। देश के प्रथम नागरिक को सच्चे न्याय से वंचित रहना पडा तो आम आदमी की क्या स्थिति रहेगी। राजीव गांधी की हत्या षडयंत्री हत्या घिनौना अपराध व देश की अस्मिता का चुनौती देने वाला था। सभी अपराधियों को फांसी या आजन्म कारावास उचित दण्ड है। तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जय ललिता ने 7 लोगों को रिहा करने हेतु केन्द्र सरकार को 3 दिन के समय का अल्टीमेटम दिया। जयललिता का निर्णय पूर्ण रूपेण अवैध व न्याय पालिका को चुनौती देने वाला हैं। राज्य सरकार को न्यायिक अधिकार नहीं है। राजीव गाॅंधी के हत्यारो की रिहाई के आदेश सिर्फ न्यायालय ही दे सकता है। जयललिता स्वंय के आदेश की बजाय न्याय पालिका में जाए। न्याय पालिका में रिहाई आदेश को अवैध ठहराया है। उपरोक्त प्रकरण पर केन्द्र सरकार की याचिका पर मार्च में सुनवाई होगी। राजनेता स्वार्थ परता वश न्यायपालिका की गरिमा समाप्त न करें।


