Published On:Thursday, February 20, 2014
Posted by NJFI media
अर्थ व्यवस्था कौशल विहीन है सभी दल, नेता और अर्थ शास्त्री
उज्जैन। छिपकलिया खिलाकर, जनता एवं देश के उत्तम स्वास्थ्य की पहल देश के क्लर्क वित्त मंत्री नेता, दल व संसद करती आई है अर्थव्यवस्था कौशल किसी में भी नहीं है। चिदम्बरम के अतिरिक्त बजट में लोभवाद, सबसीडीवाद और ब्याजवाद उभर कर सामने आया। 20 प्रतिशत ब्याज अदायगी, 12 प्रतिशत सबसीडी पर रक्षा पर 20 प्रतिशत याने 52 प्रतिशत राशि तो यू ही चली गई। अब 42 प्रतिशत में विकास शिक्षा, ग्रामोदय, उपचार, समाज सेवा, योजना गरीबी उन्मूलन व अन्य मदों पर व्यय होना है। 42 प्रतिशत व्यय से आर्थिक परिणाम प्राप्त होगे। ब्याज व सबसीडी व्यय 32 प्रतिशत है उसे ही समाप्त कर दिया जाऐ तो देश की अर्थ व्यवस्था ही सुधर जाए। भारत सोने की चिडिया भारी धन भी है, किन्तु वह कालोधन के रूप में है जो घोटाले, भ्रष्टाचार, अन्याय, शोषण सरकारी भूमियाॅं हडप। तस्करी व भारी कर चोरी द्वारा बनाया गया है विदेशों में जमा किया है भूदान की 23 लाख एकड जमीन हडपी, आराधना स्थलों में खरबों का माल दो नंबरी व कालेधन कुबेरों की भरमार योजनाओं में घोटाले पॅंूजीपति, उद्य़ोगपति, कारपोरेट तस्कर समय पॅंूजीपति, उद्योग पति, 20 प्रतिशत सम्पन्नों के खूनी जबडे में देश लक्ष्मी। अतंरिम बजट में राहतों की वर्षा की वही कालेधन कुबेरों पर मेहरबानी की है।
अर्थव्यवस्था कौशल के मूल तत्व है कि देश की भूमियों का स्वामी देश है, सभी स्वामी पट्टेदार है। अतः जमीन जो माता है उसकी निजी स्वामित्व समाप्त किया जाए व सभी को पट्टेदार माना जाए। जमीन को क्रय विक्रय महा अपराध व पाप माना जाए। देश में 80 प्रतिशत वंचित गरीब व मध्यमवर्गी है समता मूलक समाजवादी व्यवस्था हेतु अमीरी की सीमा रेखा तय की जाए परिवार को उसकी इकाई माना जाए। चाहे वह संयुक्त हो या विभक्त अतिशेष चल अचल संपत्ति राष्टीय संपत्ति घोषित की जाए।
लोभवाद, ब्याजवाद व सबसीडीवाद को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए।
सर्व प्रकार की शिक्षा व उपचार व्यवस्था का दायित्व सरकार का है।
बिजली, पानी खाद्यान्न सस्ते व सुलभता से उपलब्ध हो।
प्रत्येक हाथ का काम उसकी क्षमतानुसार अनिवार्य पूर्वक किया जाए।
उपरोक्त उद्योगों को पूर्ण विकसित किया जाए समूचा देश कुटिर ग्रामोउद्योग व पारस्परिक उद्य़ोगों से सरोबार हो। न कोई बेकार मजदूर व बेबस होगा।
उपरोक्त अर्थव्यवस्था कौशल को कठारता के साथ मूर्त रूप देने से भारत कर्ज, विहीन देश होगा, 20 प्रतिशत ब्याज देने से बचेगा, वह राशि देश व समाज विकास पर व्यय होगी प्रत्येक व्यक्ति श्रमवीर व भारत के नव निर्माण की इकाई होगा। जब सभी साक्षार, सुसंस्कारी व श्रमवीर होगे तो देश विकास होगा।


