Published On:Saturday, February 8, 2014
Posted by NJFI media
धन कुबेरों को महत्व दे रहे दल
उज्जैन। देश के राजनैतिक दल, धनकुबेरों के बंधुवा मजदूर ही सिद्ध हो रहे है हाल ही के राज्य सभा चुनाव में 58 सांसद निर्वाचित हुए। मजेदार बात यह है की 50 सांसद तो करोडपति है। मात्र आठ सांसद हल्के फूलके है। क्या राज्यसभा करोडपतियों व जनाधार विहीन राजनेताओं के लिए, राजनीति का चोर दरवाजा ही है। अब तो राज्यसभा के स्वरूप पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है। राज्यसभा में विषयों के विद्वान, विलक्षण, प्रतिभाएं, वैज्ञानिक, शिक्षाविद समाजसेवी, सेवा, निःवृत्त सैन्य विभूमि खेल प्रतिभाए, संस्कृति सभ्यता, सामाजिकता के दूत ही राज्यसभा में विद्यमान रहना चाहिए, विद्वानां को ही राज्यभा में सभी दलों को भेजना चाहिए। ममता ने इस दिशा में आवश्य कदम उठाया है। अन्य दलों ने तो राजनीति के पण्डो, गुण्डो, जनता द्वारा अस्वीकार चेहरो, पॅंूजीपतियों, दलों को राज्यसभा में भेजा है। ये ही लोग दलीय दिमागी जडता के शिकार दलीय आधार पर हंगामे मचाते है और संसद को बदनाम करते है। राज्यसभा में हंगामे के कारण, दिवंगतों को श्रृद्धाजंलि न देने का कुकृत्य हुआ है। अध्यक्ष ने अपनी पीडा व बेदना भी सार्वजनिक की है।
महा महिम को इस दिशा में कदम उठाना ही होगा, कोई भी दल, राजनेता, पॅंूजीपति को राजसभा में नहीं भेजे। जितने भी नेता है उन्ेंहे वापस बुलाये। राज सभा उच्च सदन है जहाॅं पर हर प्रकार की व्यवस्था पर गंभीर चिंतन व मनन होना चाहिए। राजनीति के पण्डे और गुण्ड, पॅंूजीपति व जनता द्वारा अस्वीकार किए गए दलों के बंधुवा ही हंगामे करते है यह रेकार्ड से सिद्ध हैं।
सभी दलीय नेताओ, पॅंूजीपतियों की राजसभा सदस्यता तुंरत समाप्त की जाए व उनके बदले क्षेत्रों की विभूतियों व विषय विशेषज्ञों को राज्यसभा सांसद बनाए जाये। विशेषज्ञों को राज्यभा सासंद बनाये जाए। दल दल बनने की बजाय विषय विशेषज्ञों की परिषद स्वरूपी होना चाहिए। यह व्यवस्था जनता चाहती है जो एनजेएफआई द्वारा महामहिम के समक्ष प्रस्तुत है। महामहिम त्वरित संशोधन व राज्यभा के स्वरूप परिवर्तन की पहल करें।


