Published On:Friday, February 14, 2014
Posted by NJFI media
प्रजातंत्र पर प्रश्न चिन्ह प्रत्येक देशवासी अपने आप में शर्मसार
उज्जैन। भारत विश्व का सबसे बडा प्रजातत्र है उसकी विश्व में बेलेट क्राति हेतु विशेष पहचान है, किन्तु राजनीति के पण्डो और गुण्डो, धनकुबेरों की विकृतियों, जनता की लोभप्रियता व मुक्तवाद, कारपोरेट जगत, उद्योगपतियों, राजनैतिक दलों नौकरशाहों व विदेशी ताकतों के बंधुवा मजदूरों, धनखोर चेहरों, नौकरशाहां बुद्धिजीवियों एवं कारपोरेट छाप संवाद पालिका ने प्रजातंत्र पर प्रश्न चिन्ह खडे कर दिए है। सत्ताखोरों नाजियों पॅंूजीपतियों व स्वदेशी आतंकी ने प्रजातंत्र को उन्माद तंत्र में बदल दिया ै संसद पर गहरी कालिख पोत दी है संविधान व्यवस्था व अर्थ व्यवस्था खतरे में हैं भारत मं प्रजातंत्र के लिए कोई स्थान न ही है। महामहिम संवैधानिक प्रमुख देशध्यक्ष न्याधिपति व सेनाधिपति है। देश अस्तित्व की रक्षा हेतु आपात काल लगाए, संविधान व संसद भंग करे देश की कमान सेना संभाले, महामहिम देश संचालन हेतु नई मंत्रि परिषद बनाए, चुनाव 2014 स्थागित करे। देश का नया कठोर संविधान बनाए, उन्मादित भ्रष्टों कालेधन कुबरों को जेल में डाले। आपार जनक अवधि तीन वर्ष की रखे। नई व्यवस्था व संविधान के साथ 2016 में प्रजातंत्र को लागू करे। देश की सभी दल नेता, पॅंूजीपति, आध्यात्मिक चेहरे व स्वार्थो लोभी जनता भी धन विकृति प्रिय हो गई है। सभी का नैतिकपतन हो चुका है राष्टीय भावनाए व अनुशास भी चरित्र मर चुका है। देश का अस्तित्व ही समाप्त हो रहा है।
देश, प्रजातंत्र व संसद की रक्षा हेतु महिम तुरंत ही इसी रूप कठोर कदम उठाये


