Published On:Friday, February 14, 2014
Posted by NJFI media
देश को बचाओ राजनैति के पण्डो, गुण्डों और शातिर स्वदेशी आतंकियों से
उज्जैन। भारत विश्व की महाशक्ति बनने की देहलीज पर है, किन्तु विदेशी ताकते, विदेशी व स्वदेशी आतंकियों, राजनीति के पण्डां गुण्डां, धन सत्ता खोर चेहरो, नाजीवादी देश के दलों, नताशाहों, माफिया समूहों तस्करों व विदेशी ताकतों व धन के गुलामों और बंधुवा मजदूरों को भारत का गौरवशाली अस्तित्व व स्वरूप, पंसद व स्वीकार नहीं। सभी बहुआयामी षडयत्रों व साधनों द्वारा देश की शातिर ढंग से हत्या कर रहे है और अपना शौर्य जता रहे ै। मादी हो या सोनिया, माया, मुलायम, नितिश, ममता, रमनसिंह जयललिता अडवाणी देवगौडा, शिवराज, रमनसिंह सभी एक ही थैली के चट्टे बट्टे है। मोदी नेता नहीं, महामक्कार बहुआयामी व नाजीवादी चेहरा है सोनिया शहीद की पत्नि है किन्तु गरीबों के प्रति हमदर्दी रखती है, किन्तु सत्तावादी राजनतिक गुण्डों व पण्डों के चक्रव्यूह में है। स्वंय की विचार धारा को खण्डित करने पर अमादा है। समाजवादी भी अपने अपने इंह के कारण, लोहियावाद को बडावा दे रहे है। देश की सभी व्यवस्था पर ध्वस्त हैं देश में वही सबकुछ हो रहा है जो सीआयए चाहती है। भारत पाक में भीषण युद्ध की उसका लक्ष्य है। सोनिया के वामपंथी रूख से सीआयए के मंसूबों के अनुरूप स्वदेशी आतंकियों की सत्ता अपहरणवादी सिन्डीकेट सक्रिय है। मोदी व संघ का रिमोट भी उनके हाथों में है। 90 प्रतिशत संवाद पालिका कारपोरेट छाप है वह भी देश द्रोही सिन्डीकेट से अनुबंधित है। विचारक, चिन्तक व लेखक तक अपनी जनआस्था व देशभक्ति व सत्य से विमुख हैं जनता भी लोभवादी मुक्तवादी, नाटक नौटंकी प्िरय हो गई है। धन, सोाच, विचार व क्रान्ति का दोह संस्थाकर अपने हाथों से कर रही है। राजा और रंक का चरित्र एक जैसा हो गया है। प्रजातंत्र उन्माद तंत्र नाटक तंत्र, धन,सोच विचार व क्रान्ति का दाह संस्कार अपने हाथों से कर रही है। राजा और रंक का चरित्र एक जैसा हो गया है। प्रजातंत्र, उन्माद तंत्र नाटकतंत्र धन तंत्र व सत्ता के भूखे भेडियों के खूनी जबडां में है। ऐसे हालात में जहरीले प्रजातंत्र की मौत ही एक मेव समाधान है। अब तो किसी भी प्रकार का स्टेम सेल इन्जेक्शन देना भी व्यर्थ की कवायद होगी।
महामहिम के नेतृत्व में दश व प्रजातंत्र रक्षा अभियान अनिवार्य है। महामहिम देशाध्यक्ष न्यायाधिपति सेनाधिपति व संविधान प्रमुख है। उन्हे ही क्रान्तिवीर बनना होगा। अराजकता समाप्ति हेतु सीमित प्रजातांत्रिक तानाशाह ही बनना होगा। देश में आपातकाल की घोषणा संसद भंग करना, वर्तमान संविधान को निरस्त करना नया संविधान जो अति कठोर व देश रक्षक हो उसे बनाना व लागू करना, चुनाव 2014 निरस्त करना देश संचालन वर्तमान के राजनैतिक स्वार्थो एवं दलीय कारनामां के बस की बात नहीं अच्छे सैन्य व विषय विशेषज्ञ लोगों की मंत्रि परिषद बनाना सर्वप्रकार की अराजकता समाप्त करना तथा तीन वर्षो बाद, पुनः नव प्रजातंत्र की स्थापना कठोर विधि एवं अभिसमयों के साथ करना, स्वर्णिम समता मूलक समाजवादी स्थापना करना, धन विकृति लोभवाद, समाप्त करना क्षेत्रीयता समाप्ति व जबाब दे ही सरकार हेत देश में अचलीय ढाचा करना तथा केन्द्र व अचलों में लोभप्रिय सरकारों के गठन की संवैधानिक व्यवस्था करना, धन महत्व समाप्त करने व अन्य विकृतियों समाप्ति हेतु देश में अमीरी की सीमा रेखा तय करना मौलिक अधिकारों में भूमि व पॅंूजी का अधिकार समाप्त करना, सभी भूमि देश की संपत्ति बनाना व वर्तमान के सभी भू स्वामियों को भूमि का पट्टेदार बनाना व नग्द की सीमा रेखा तय करना, प्राकृतिक संसाधनों का राष्टीय करण व उनका लाभ देश के प्रत्येक नागरिक को मिले ऐसी संवैधानिक साम्यवाद नहीं, अपितु स्वर्णिम देश व समाजवादी तथा स्वस्थ व स्थायी पजातंत्र की स्थापना के मूल मंत्र होगे। देश मं फिल्ड मार्शल का निगरानी पेनल भी स्थापित करने की संवैधानिक व्यवस्था अनिवार्य है।
महामहिम प्रणव दा पर देश प्रजातंत्र व जनता को बचाने तथा राजनीति के पण्डो, गुण्डों नाजीवादियों स्वदेशी आतंकियों तथा देशद्रोहियों के षडयत्रों को समाप्त करने का अहं दायित्व है। जन विचार सोच व निर्णय एनजएफआई महामहिम के समक्ष देश व प्रजातंत्र की रक्षा हेतु प्रस्तुत है। महामहिम तटस्थ न रहे, तुरंत कार्यवाही करे, अन्यथा देश का इतिहास उन्हे कभी माफ नीं करेगा अब अति के अंत का समय आ चुका है किसी न किसी को देश अस्तित्व युद्ध में अर्जुन तो बनना ही होगा। अब देश के दुर्योधनो, दुःशासनों तथा शासन कौशल से विहीन दरिन्दो की भीड का सफाया भी करना होगा।
देश अस्तित्व की रखा हेतु कडवी से कडवी दवा देना जरूरी है। जो भी कडवी दवा का विरोध करे उसे ताउम्र कृष्ण मंदिर में रखने से ही हिचकना होगा। जीव दया का सिद्धांत भी महामहिम को भूलना ही होगा।


