Published On:Sunday, February 9, 2014
Posted by NJFI media
गेंग रेप व बलात्कार की घटनाआं में निरंतर वृद्धि, मातृशक्ति संकट के दौर में
उज्जैन। समूचे देश में गेंग रेप ओर बलात्कार अब फैशन व शौक हो गया है। हवस के भूखे भेडिये 3 वर्षो तक की मासूमों को अपनी हवास का शिकार बना रहे है, पिता अपनी पुत्रियों के साथ, ही कू्रर बलात्कार कररहे है। परिवारों की समाजिकता ही समाप्त हो रही, विश्वास की कू्रर हत्याएं हो रही है। प्रश्न यह की दोषी कौन।
सूक्ष्म अध्यन के बाद परिणाम सामने आए की दूषित खाद्य पदार्थ शराब, नशीले मादक पदार्थ टीवही पर उत्तेजक व षडयंत्री धारावाहिक, भारत में पोर्न साइड बंद न करना, धन कुबेरों की धन विकृति कुशिक्षा, उत्तेजक पहनावा, आॅंखों में दृष्टी दोष। घिनौनी राजनीति, गर्म गाश्त को अपनी इच्छा महत्वकाक्षा व लक्ष्यों की पूर्ति का माध्यम बनाना। गरीबी से मुक्ति हेतु अपनी अस्मिता बेचना गर्म गोश्त के व्यापार कर, धनकुबेर बनना। मातृशक्ति को अपने कुचको्र में फंसा कर नगर वधुए बनाना, ये सभी कुकृत्य परिवारों में हो रहे है। पुलिस सुरक्षा देने की बजाय प्रभावितों के साथ मुहॅं काला करते है। साम्प्रदायिक प्रतिशोध हेतु गेंगरेप किए जाते है। धनकुबेर बनने हेतु मानव तस्करी की जाती है। बंधुएं जलाई जाती ह। महिलाएॅं ही जिस्मफरोशी के अड्डे चलाती ह। शिक्षालयों, आराधना स्थलों तक में गर्मगोश्त के गौरख धंधे होते है। मातृशक्ति निःसन्देह संकट में है। शर्म, हत्या, सुसंस्कार, पावनता सभी सीमाएं समाप्त हो गई। सरकारे भी बेबस है सभी चिंतारत है की मातृशक्ति की अस्मिता की रक्षा कैसे की जाये सभी को राजनीति के रंग में रंग है। जो मातृशक्ति सुसंस्कारों व पावनता के ठेकदार बनते है, उनके दामन भी दागदार ही नजर आ रहे हैं धन, राजनीति, नशा व निरकुंश शिक्षा , कुसंस्कारी फूहड सीरियल, देश में प्रसारित हो रही पोर्न साइडस भयादोहन व आत्मिक सन्तुष्टी की मुद्रा बना ली है। परिवारों में भी उनका विश्वास सामाजिक व रक्त संबंधी भावना ही समाप्त हो गई है। गर्मगोश्त के घिनौने नाटक, मंदिरो, पिकनीक स्पाटस, मेलो, सडकों, सायबर, कैफे, कोचिंग क्लासेस,परिवारों में नजर आ रहे है। ऐसे घिनौने कुसंस्कारी परिवेश में मातृशक्ति स्वंय की रक्षा कैसे करे, यही अहं समस्या है। हर आॅंख में हवस व खून की भावना, हाथ में खजंर और विश्वास, संस्कार व संबंधों की हत्या का जूनून है।
एक बडे महा सामाजिक व सुसंस्कारी परिवर्तन की जरूरत है, किन्तु परितर्वन कौन लायेगा, यही अहं समस्या है विवेकवादी, आत्म चैतन्य, महा विश्वासी एवं विकृति विहीन नव समाज सरचना ही एक मेव विकल्प व मार्ग है, किन्तु उपरोक्त विकल्प मार्ग को कोई बनाना नहीं चाहता। सभी को अपने अपने भाग्य मकानों की चिंता है। दश, समाज व परिवार रूपी विख्वासी व सुसंस्कारी घर बसाने को कोई तैयार नहीं हैं। कोहराम, मचाना लक्ष्य नहीं, समाधान प्रस्तुति ध्येय। नैतिक व पारावारिक शिक्षा व्यवस्था, टीवी पर फूहड व कुसंस्कारी सिरीयल प्रतिबंध करो, सेक्सी पोर्न साइडस का प्रसारण देश में रोको। कुकृत्यों बलात्कारियों गेंग रेपर्स वे चाहे कोई भी हो मात्र 15 दिन में मृत्युदण्ड देने का कठोर विधान बनाओ 90 प्रतिशत कुसंस्कृति , सुसंस्कार व घिनौनी भावनाएं समाप्त होगी नशीले मादक पदार्थो की बिक्री व सेवन प्रतिबंधित करो।


