Published On:Wednesday, February 12, 2014
Posted by NJFI media
एक और शातिर पॅंूजीवादी अप्रत्यक्ष गुलामी की ओर बढता भारत
उज्जैन। लगता है भारत के हाथों में उन्मुलता व आजादी की भाग्य रेखा ही नहीं है। पहले राजा रजवाडों, सामंतों व जागीरदारों की गुलामी सही, उसके बाद भवनों की उसके बाद अंगे्रजों की आजादी के बाद सफेद पोश संभ्रात डकैतों की और 2014 अमेरिकी पॅंूजीवादी की अप्रत्यक्ष गुलामी की ओर भारत जा रहा है। विश्व चैधरी व शातिर व्यापी अमेरिका ने रूस तोडा, पाक को अपना बंधुवा मजदूर अब भारत को अपना निशाना बनाया, सीआयए क माध्यम से भारत को अपना अप्रत्यक्ष गुलाम बनाने की पहल की गई, स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी ने उसके सभी षउयंत्र नाकाम किए, उन्हें अपने जीवन का बलिदान देना, खाडी युद्ध में स्व. राजीव गांधी की अहं भूमिका अमेरिका की, अखरी उन्हं भी अपने जीवन से हाथ धोना पडा। सोनिया गांधी भी अमेरिकी पॅंूजीवादी गुलामी के खिलाफ थी। परमाणु करार के पूर्व सोनिया की रूस यात्रा अमेरिका को अखरी थी, परमाणु करार प्रस्ताव तो पास हुआ, किन्तु वह अमेरिका के हितों के अनुरूप नहीं था। इस कारण उसमें संशोधन चाहता था, किन्तु सप्रंग सरकार ने नहीं किए तो अमेरिका को मिर्ची लगी और उसने कांगे्रस नीत वाली सप्रंग सरकार को अपदस्य करने की प्रक्रिया अपनाई। सिख दंगे मामले में सोनिया के खिलाफ प्रकरा दर्ज करवाया अब साक्ष्यों हेतु ईनामों की घोषणा की। अमेरिका न मोदी कार्ड खेलना शुरू किया आर उसके लिए भारतीय नेताओं से संवाद के बहाने मोदी को शाबासी देने हेतु पावेल को भेजा। अमेरिका का लक्ष्य सप्रंग का मोर्चा समाजवादी ताकतों को कमजोर करना है। वामपंथीयों को अपना रूख बदलना जरूरी है। सप्रंग वाम मोर्चे की देन है। अतः वामपंथी ममता के व कांगे्रस के विरोध की बजाय सामजस्य बनाए। अमरिका ममता पर भी डोरे डालने की पहल कर चुका है। समाजवादियों को भी भारत को अमेरिका पॅंूजीवादी गुलामी के खिलाफ महासघर्श करना है। सप्रंग के सभी दलों को जनता परिवार मानना जरूरी हैं देश के मुस्लिम मतदाताओं को भी मोदी माध्यम से आ रही अमेरीकी पॅंूजीवादी गुलामी के खिलाफ पंथ निरपक्ष ताकतों को साथ देना अनिवार्य है। मोदी तो मुखौटा है नाजीवादियों, पॅंूजीपतियों व कारपोरेट जगत का यह बात स्पष्ट जान कर धनबल द्वारा उ.प्र. में मुस्लिम नेताओं को खरीदने का कुचक्र मोदी गेंग द्वारा चलाया जा रहा ह।
सभी पंथ निरपेक्ष दल स्पष्ट जान ले की पूंजीवादी गुलामी से मुक्ति तथा उसके मुखौटे मोदी को मात देने हेतु पंथ निरपेख नता का धु्रवीकरण करना जरूरी ह। पंथ निरपेक्ष दल अपनी मजबूती के आधार पर पंथ निरपक्ष प्रत्याशी का ही पक्ष ले। हर स्थान पर प्रत्याशी खड करने की बजाय अपने गढ क्षेत्र में ही प्रत्याशी खडा करें, अन्य क्षत्रों में पंथ निरपेक्ष ताकतों को साथ दे। सप्रंग को सत्ता से हटाना, पंथ निरपेक्ष ताकतों, वामपंथियों ताकतों का लक्ष्य है और वे मोदी संघ में केन्द्रित हो गई है। देश के पूॅंजीपति, उद्योगपति, कारपोरेट जगत व अनुबंधित मीडिया तो सीआय ए के अप्रत्यक्ष लक्ष्यों की प्राप्ति के एजेन्ट बने हुए है। सभी ने मोदी व संघ को अनुंबधित कर रखा है और हजारों करोडों का धन दे रहे है। लोकसभा चुनाव 2014 पॅंूजीवादी गुलामी और 80 प्रतिशत वंचितों की आजादी और अर्थ व्यवस्था के बीच होगा। 80 प्रतिशत वंचित व पंथ निरपेक्ष ताकतों की जीत तय है।


