Published On:Wednesday, February 12, 2014
Posted by NJFI media
आत्मघाती जल एवं वायु प्रदूषण
उज्जैन। वाहनों की बाहुल्यता से उर्जा ईधन द्वारा दिल्ली भंयकर रूप से प्रदूषित है। प्रदूषित जल एवं वायु प्रदूष्ज्ञण से तीन बच्चे वर्ण में मर जाते है। यह रपट उजागर हुई। समूचे प्रदेशों में जलवायु एवं ध्वनि प्रदूषण चरम पर है। सरकार सत्तावादी खेलो व सत्ता सुन्दरी के अंग, भंग के रसा स्वादन में मस्त है। असन्तुलित होता पर्यावरण जल, वायु, प्रदूषण, मरते इन्सानों की किसी को चिंता नहीं प्रदूषण कर्ताओं के खिलाफ कानून तो बना दिए किन्तु उस पर अमल को सरकारे, महाअपराध मानती है। नदियों, समुद्र, धरती आकाश सभी प्रदूषित किए जा रहे और प्रदूषण को विकास की पगडंडी व सीढी माना जा रहा। धनबल द्वारा प्रदूषण कर्ता अपने अपराध छुपाते हैं नदियाॅं प्रदूषित हो रही शहरों व गांवों मं प्रदूषण फैल रहा। अवैद्य खनन से धरती असन्तुलित हो रही है। औद्योगिक प्रदूषण का उन्माद सर्वग नागदा जैसा शहर गैस चेम्बर के नाम से जाना जाने लगा। प्रदेश के सभी उद्योग प्रदूषण के अपराधी प्रदूषण के कारण नदियाॅं प्रदूषित हो रही है। जलप्राणी दम ताड रहे है। पृथ्वी असंन्तुलित हो रही है मवेशी मर रहे, आदमी केंसर ब्लैड के उपरोग चर्मरोग का शिकार हो रहा, उसकी आयु कम हो रहा हवाए जहरीली हो रही, एसिड की वर्षा हो रही। आदमी अपनी श्रवण भक्ति खो रहा, अधत्व में वृद्धि हो रही, होडिगस की भरमार से वातावरण प्रदूषित हो रा है सरकार बेखबर।
आजादी के आज तक देश में किसी भी प्रदूषण कर्ता को जेल में नही डाला नए जबकी गंभीर अमानवीय अपराध के दोषी है यदि जेल भेजा हो तो सरकार सूची जारी कर सरकार ही प्रकृति, जीवजन्तु व मानव हत्यारों की सरक्षक नजर आ रही। प्रदूषण के कारणों वर्ष भर में तीन हजार भरने वाले नव जातों की आत्मा पूछ रही है देश, मसीहाओ, उद्धारको व धनखोर भ्रष्ट क्लर्कस ये जलवायु व ध्वनि प्रदूषण कब समाप्त होगा, पर्यावरण स्वच्छ व सन्तुलित कब होगा। किन्तु उत्तर देने तक की क्षमता उनमें नहीं। आदमी प्राणी यूं ही मरते रहेगे और सरकारे उनका मृत्युभोज एवं श्राद्धखाली रेगी धिक्कार ै ऐसी केन्द्र व राज्य सरकारों को।


