Published On:Thursday, February 27, 2014
Posted by NJFI media
बोधोत्सव है महा शिवरात्रि पर्व
उज्जैन। आद्यदेव शिव का महोत्सव है महाशिवरात्रि पर्व। इसी दिन महर्षि दयानंद को बोध हुआ था। महर्षि दायानंद परिवार शिव भक्त थे महाशिवरात्रि पर महा जागरण हो रहा था। दयानंद परिवार जागरण में व्यस्त था। दयानंद के माता पिता को झपकी लगी, किन्तु 5 वर्षीय दयानंद जाग रहे थे। उन्होंने देखा की एक चूहा शिवप्रसाद खा रहा था। दयानंद की मष्तिष्क व विवेक इन्द्रिया जागृत हुई। जिसकी हम भलि कर रहे है वह स्वंय अपने प्रसाद की रक्षा नहीं कर सकता तो हमारी क्या करेगा। उसी क्षण से सत्य की खोज व धर्म महत्व जानने महार्षि दयानंद निकल पडे। ताकि उम्र निष्ठ ब्रम्मचारी रहने की संकल्प किया। सत्य की खोज हेतु भटके, किन्तु कोई नहीं बता पाया। नेत्रहीन स्वामी के द्वार गए उन्होंने पूछा कौन है दयानंद बोले यही जानने आया हॅंू। स्वामी ने उन्हें अपना शिष्य बनाए। दयानंद ने संस्कृत व वेदों का अध्ययन किया। अंगे्रसी न पढने और विदेश न जाने का संकल्पलिया उसे पूर्ण किया। महर्षि दयानंद 500 वर्ष तक जीना चाहते थे यागी बने। उन्होंने भारत व जनता को पूर्ण वेदाती बनाना चाहा। राजा और रंक का आचरण सुधारना चाहा, वृद्ध राज्य व्यवस्था की पहल की।
यदि राजा और रंक पूर्ण वदंाती हो जाए तो भारत सुन्दर स्वर्ग हो जाए। किन्तु अधर्मी कुकर्मी, स्वार्थी, पाखण्डी अंध विश्वासी भाग्यवादी व भौतिकतावादी राजा और रंक बहुआयामी विकृतियों के पुतले है। भारत स्वंय तुल्य कैसे बने।


