Published On:Thursday, February 27, 2014
Posted by NJFI media
महाशिवरात्रि पर्व सम्पन्न भक्तों ने औपचारिकता का निर्वाहन किया
उज्जैन। समूचे देश में महा शिवरात्रि पर्व सम्पन्न हुआ। मंदिर सजे , महाआरती हुई, भजन संध्या के कार्यक्रम हुए लोगों ने उपवास की नौटंकी की फलाहार के नाम पर रोजना से अधिक अनेक प्रकार के मिष्ठानों का स्वाद चखा व उपवासी कहलाए। भारतीयों का चरित्र ही, औपचारिकता निर्वाहन का हो गया है। 99प्रतिशत भक्तों ने औपचारिकता निभाई। सच्चे उपवास के साथ आत्म चिंतन नहीं किया, स्वंय के सत्य से साक्षात्कार नहीं किया न ही आत्मिक शुद्धि हेतु प्रायाश्चित किया और न ही विवेकयज्ञ किया। नशे, उनमाद में ही समय गवांया। आद्यदेव शिव भी उपरोक्त प्रकार की नादानी से हतप्रभ ही हुए। महाशिवरात्रि की एक छोटी सी घटना ने, विवेकानंद को जन्म दिया, जो विश्व विभूति बने। हम तो विश्व विभूति बनना दूर, सच्चे उपवासी विभूति भी नहीं बन पाए। ािवत्व मार्ग आसान है किन्तु हम उसे अपनाना ही नहीं चाहते। अंह, पाखण्ड, स्वार्थ, दुष्कर्म, स्वउद्धार, उत्पीडन, प्रकृति नष्टीकरण ही हमारा चरित्र व जीवनयात्रा लक्ष्य नष्टीकरण ही हमारा लक्ष्य हैं। हम शिवभक्ति की नाटक नौटंकी करते है और शिवत्व से दुर रहते है। दोहरे, दोगले, औपचारिकता, अहं, स्वार्थ अन्याय, शोषण झूठ विश्वासघात हमारे जीवन के अवयव हो गए है शिवत्व रामत्व व कृष्णत्व मार्गी हो ही नहीं सकते।


