Published On:Sunday, March 16, 2014
Posted by NJFI media
देश को तबाह व बर्बाद कर रही सत्तावादी राजनीति,सभी भ्रमित
उज्जैन। देश का अप्रिय व नग्न सत्य की राजनीति के पण्डों और गुण्डों, स्वार्थी व लोभवादी जनता ने प्रजातंत्र को लोभतंत्र गुण्डांत्रत धनतंत्र दला तंत्र व अपराध तंत्र बना दिया ै राजा और नग्नावस्थ में खडे है। राजनीति के पण्डे और गुण्डे, अनेक दलों में विद्यमान है, सत्ता धन, सुख सुविधा भोग, शातिर व फूहड अपराध भ्रष्टाचार, घोटाले धनखोरी, झूठ, फरेब, गप्पे विश्वास घात मक्कारी अराजकता झूठी सिद्धांतादिता नाटक नौटंकी धनकुबेरों प्ॅाूजीपतियों कारपोरेट जगत, माफिया समूहों एवं विदेशी ताकतों की गुलामी चंदा खोरी व कुनीति सभी का चरित्र व जीन विधा और कला हो गया है, स्वंय को पाक साफ व अन्यों को अपराधी जताना अच्छा लगता हैं। सोनिया , मोदी, केजरीवाल लालू यादव पसवान, कारत यचुरी मायावती व अन्यी का चरित्र एक समाज ै। सभी का विश्वास लोभवाद सत्तावांद धनवाद, चंदावाद एवं प्रायोजित वाद मं है। देश को कोई देश नहीं मान रहा है। संसाद 377 सांसद करोडपति 77 अपराध्ी है। सांसद को धन, सुख सुविधा की भूख है। वे देश की चिंता क्यों व कौन करें।
देश में बहुआयामी अराजकता, व स्वदेशी आतंकियों की कू्ररता, आर्थिक असमानता, गरीबी, भ्रष्टाचार घोटाले सामाजिक न्याय, मातृशक्ति की रक्षा, आम आदमी केन्द्रित अर्थव्यवस्था अपराध कर्जविहीन देश, स्वस्थ सामाजिकता सच्चे आत्मिकता त्या, लोक उद्धार से कोई सरोकार नहीं सभी भारत को वस्तु मान कर ब्रांड बनाने कारपोरेट इन्डिया बनाने और भीड भरा भूखण्ड बनाने के दावे भर रहे है अमीरी की सीमा रेखा तय करना, स्वर्णिम समाजवादी भारत को महाशक्ति व विश्व का आदर्श देश बनाने हेतु केन्द्र व राज्यों या अंचलों में लोकप्रिय सरकारों के गठन तथा क्षेत्रयवादिता की समाप्ति हेतु अंचलीय शासन व्यवस्था का संवैधानिक व्यवस्था, लोभवाद की समाप्ति गरीबी उन्मूलन प्रत्येक नागरिक को सर्वप्रकार की निःशुल्क शिक्षा, उपचार व्यवस्था से सरोकार नहीं जनकोष का उपयोग, लोकउद्धार व अधो सरंचना आधारित रचनात्मक विकास को अपराध माना जा रहा। प्रजातंत्र को गुंण्डातंत्र, लोभतंत्र धनतंत्र कारपोरेट तंत्र, स्वार्थ तंत्र बना रहे है सभी दल धरती जो म सबकी माॅ है उसकी खरीदी बिक्री तक नीं रोक पा रहे ये प्रजातंात्रिक गुण्डे भारती की असम्त के सौदागर भी ये ही है जो जनता चाहती है वे नियम व कानून बनाना महापाप समझतेे है। सभी दलों संस्कृति, सभ्यता आदर्श राष्टीयता, आध्यात्म के ठेकदारों का उपरोक्त कुचरित्र में विश्वास है देश जिंदा कैसे रहे, राजा ही देश व रंक भक्षक चरित्र में नजर आ रहा, किन्तु देश का दुर्भाग्य है कि वह अति विकृत व घिनौनी स्थिति में है। वह अनेक अपराधों की हिरात में है। विेकहीनता झूठी सिद्धंातवादिता अशिक्षा, दिखावे, पाखण्ड अंध विश्वासी चमत्कारवादी धर्म में विश्वास तथा सच्ची आध्यात्मिकता से घृणा आत्मिक रूप से अमीर किन्तु अपने अपने निजी स्वार्थ पूतिहेतु धनखार साम्प्रदायिकता वादी मानसिकता स्वातः सुखायवादी नाशा प्रिय, महास्वार्थीपन उसकी जीवन यात्रा की विधा व कला हो चुकी है। निष्काम कर्म, सेा लोक उद्धार सच्ची व कट्टर आध्यात्मिकता, नियति श्रृगार आत्म चिंतन विचार वादी चरित्र से पलायन करना, क्राति भावों को खाना, लोभ व प्रलोभन के समक्ष आत्म समर्पण करना, स्वंय को भिखारी मानना तथा देश समाज व व्यस्था भंजक विदेशी व स्वदेशी आतंकियों की गुलामी करना, स्वंय को उच्च व अन्यां को निम्न मानना, सर्व अपमानक चरित्र रखना। उन्माद, अन्याय, शोषण व कुकर्मी को अपना शौर्य मानना रंक का चरित्र हो गया है विवेकहीनता को महापतन की बजाय मा बरदान मानने की मानसिकता रक की है।
देश के राजा और रंक का घिनौना चरित्र महा विनाशक देशभजक व देश अस्तित्व समाप्त करने वाला है। यदि देश की रक्षा करना है तो राजा और रंक की रक्षा करना है तो राजा को अपना चरित्र व्यवहार व नीति नियत सुधारना ही होगी, अन्यथा देश छिन्न भिन्न हो जायेगा।


