Published On:Wednesday, March 5, 2014
Posted by NJFI media
तमिल सियासत को दरकिनार कर राजपक्षे से मिले मनमोहन
नेपी ता (म्यांमार), विशेष संवाददाता। तमिलनाडु के सियासी दबावों और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के विरोध को दरकिनार कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात की। हालांकि, बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से इतर हुई इस मुलाकात में राजपक्षे को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका के खिलाफ आए प्रस्ताव पर मतदान को लेकर मनमोहन से कोई भरोसा नहीं मिल सका।
म्यांमार की राजधानी में जिस वक्त दोनों नेता मिल रहे थे, लगभग उसी वक्त जिनेवा में श्रीलंका के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में रखा गया। अमेरिका तथा कई यूरोपीय मुल्कों द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव 2009 में लिंट्टे के खिलाफ हुए युद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघनों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग करता है। प्रस्ताव पर इस महीने के अंत में मतदान होना है।
मनमोहन और राजपक्षे के बीच 25 मिनट की मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों के साथ ही संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का भी जिक्र हुआ। हालांकि विदेश मंत्रालय प्रवक्ता के मुताबिक इस बारे में कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई। दोनों पक्षों के लिए यह मामला काफी संवेदनशील है।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के इस बेहद नाजुक सियासी मुद्दे को लेकर स्थानीय राजनीतिक दल राजपक्षे से प्रधानमंत्री के मिलने के विचार पर भी विरोध दर्ज करा चुके हैं। सत्तारूढ़ अन्नाद्रुमक और संप्रग में सहयोगी रहे द्रमुक जैसे दलों का आग्रह है कि भारत को ही श्रीलंका के खिलाफ मानवाधिकार हनन मामलों की अंतरराष्ट्रीय जांच का प्रस्ताव लाना चाहिए। घरेलू राजनीतिक चिंताओं और श्रीलंका में रणनीतिक हितों के द्वंद्व के बीच भारत कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता है।

