Published On:Sunday, March 23, 2014
Posted by NJFI media
गरीबों का महंगा और प्रदूषित प्रजातंत्र
उज्जैन। 16 वी लोकसभा पर 30 हजार करोड चुनावी व्यय होगा। बाद में नेता, अफसर मंत्री संत्री पॅंूजीपति 5 वर्षो से देश जनता व अर्थ व्यवस्था को टोंच कर खा रहे है खूब पेटोल व डीजल पीयेंगे हवाओं में उडेगे और विदेश यात्राओं का आनंद लेगे, अभी तक ऐसा ही होता रहा है देश की 80 प्रतिशत आवादी आम भी वंतिचों के वृत्त में हैं चुनावी सभाओं रैलियों विज्ञापनों पर हजारें करोड व्यय हो रहा हैं सभी दल मंचों से देश व जनहित मुद्दों पर जन समस्याओं विकास व उद्धार योजनाओं से विमुख हैं सभी स्वंय को हरिशचन्द्र व अन्यों को चोर बता रहे है। सभी का चरित्र गपेडी है। कोई भी दूध् का धूला नहीं है सभी अपने अपने हमाम में नगंे है मोदी हो या राहुल, ममता हो या मायाा या जय ललिता देश प्रजातंत्र व आजादी के लायक ही नहीं हैं।
गरीब का प्रजातंत्र मौलिक व आम आदमी केन्द्रित होना चाहिए अभी तो समूचा देश सफेद काले पीले व तिरंगे हाशियों का चरागाह बना हुआ है। संसद तो पॅंूजीपतियों डकैतों धन कुबेरों व अपराधियों का अड्डा है। उसके गठन पर 30 हजार करोड का अनुत्पादक व्यय व्यर्थ हैं गरीबों के गरीब प्रजातंत्र की अनिवार्यता हैं किसी भी संसद मंत्री नेता व विधायक को चेतना पेन्शन आवास व अन्य मंत्री नेता व विधायक को वेतन पेन्शन, आवास व अन्य सुविधाएं नहीं होना चाहिए। चुनाव प्रचार पर व्यय शून्य होना चहिए। सरकार को ही चुनाव प्रचार करना चाहिए दलीय व व्यक्तिगत प्रचार प्रतिबंधित होना चहिए।


