Published On:Wednesday, March 19, 2014
Posted by NJFI media
साढ़े दस प्रतिशत की दर से विकास की संभावना
रियलटी, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर और व्यय प्रक्रिया में सुधारों को लागू करने तथा सेवा, मनोरंजन, सूचना, संचार तथा अनुसंधान एवं विकास जैसे क्षेत्रों पर जोर देने से भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को साढ़े दस प्रतिशत सालाना तक पहुंचाया जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन में भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि देश में रोजगार योग्य लोगों का एक बहुत बड़ा समूह मौजूद है, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में सक्षम है। इसके अलावा आर्थिक सुधारों के नीतिगत निर्णयों को संतोषजनक तरीके से लागू नहीं किया गया है। पिछले कई वषरें में नीतिगत निर्णय नहीं लिए गए हैं और पुराने निर्णयों को भी भली भांति लागू नहीं किया गया है।
वर्ष 2008 से पहले अनुकूल वैश्विक स्थिति और घारेलू स्तर पर नरम मौद्रिक नीति तथा वित्तीय समावेशन के कदमों के कारण अर्थव्यवस्था ने उच्च आर्थिक विकास दर हासिल की है। इस अवधि में जीडीपी की वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत हो गयी। प्रति व्यकित जीडीपी भी 6.5 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गयी। हालांकि कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों रियलटी, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर और व्यय प्रक्रिया में सुधारों को अभी तक पूरा क्रि यान्वयन नहीं हो सका है। यह इसका सबूत है कि अर्थव्यवस्था में विकास की बहुत संभावनाएं मौजूद हैं।
भविष्य में 36.8 प्रतिशत की घरेलू बचत दर प्राप्त करने की संभावनाएं बहुत अधिक है। इसके बाद 38 प्रतिशत की निवेश दर भी हासिल की जा सकती है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्हें अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ मिल रहा है। देश में रोजगार योग्य आयु 25 से 65 वर्ष के समूह का अनुपात अधिक है और यह लगातार बढ़ रहा है।

