Published On:Saturday, March 1, 2014
Posted by NJFI media
अमेरिका से मनमोहन को आएगा समन
न्यू यॉर्क
वॉशिंगटन में एक अमेरिकी जज ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को समन भेजने संबंधी सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की अर्जी मंजूर कर ली है। एसएफजे अमेरिकी सिखों का एक गुट है। इस गुट ने मनमोहन के कार्यकाल में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में समन भेजने के लिए अर्जी दी थी। मालूम हो कि 1965 के हेग सेवा प्रस्ताव के तहत न्यायिक दस्तावेज को एक देश से दूसरे तक बिना राजदूत और कूटनीतिक चैनलों के भेजा जा सकता है।
सितंबर 2013 में वॉशिंगटन यात्रा के दौरान वॉशिंगटन संघीय अदालत ने मनमोहन सिंह के खिलाफ सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की अर्जी पर समन जारी किया था। एसएफजे ने मनमोहन सिंह पर भारत में सिख समुदाय के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। मनमोहन सिंह को भारत में समन थमाए जाने के लिए समयसीमा बढ़ाए जाने संबंधी एसएफजे की अर्जी पर जज जेम्स ई बोसबर्ग ने 28 फरवरी को जारी आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता 14 अप्रैल 2014 तक तामील होने का सबूत पेश करेंगे या तामील के सिलसिले में हुई प्रगति के बारे में अदालत को अवगत कराने के लिए स्थिति रिपोर्ट पेश करें।
जब वित्त मंत्री थे
एसएफजे संस्था का आरोप है कि 90 के दशक में मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री होते हुए बगावत को दबाने वाले ऐसे कई सेना के ऑपरेशन को फंड दिया गया, जिसमें कई हजारों सिखों की जान गई। उनके इस कार्यकाल के अंतर्गत लोगों को मारा गया और यातनाएं दी गईं। एसएफजे के वकील गुरपतवंत सिंह पन्नुन ने कहा कि हाल ही में अमेरिका में जारी मानवाधिकार की सालाना रिपोर्ट भी हमारे आरोपों को सही साबित करती है। अमेरिका में एलेन टॉर्ट क्लेम ऐक्ट (एटीसीए) और टॉर्चर विक्टिम प्रोटेक्शन एक्ट (टीवीपीए) के तहत संघीय अदालतें विदेशों में हुए मानवाधिकार उल्लंघन के केस की सुनवाई कर सकती हैं।
वॉशिंगटन में एक अमेरिकी जज ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को समन भेजने संबंधी सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की अर्जी मंजूर कर ली है। एसएफजे अमेरिकी सिखों का एक गुट है। इस गुट ने मनमोहन के कार्यकाल में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में समन भेजने के लिए अर्जी दी थी। मालूम हो कि 1965 के हेग सेवा प्रस्ताव के तहत न्यायिक दस्तावेज को एक देश से दूसरे तक बिना राजदूत और कूटनीतिक चैनलों के भेजा जा सकता है।
सितंबर 2013 में वॉशिंगटन यात्रा के दौरान वॉशिंगटन संघीय अदालत ने मनमोहन सिंह के खिलाफ सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की अर्जी पर समन जारी किया था। एसएफजे ने मनमोहन सिंह पर भारत में सिख समुदाय के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। मनमोहन सिंह को भारत में समन थमाए जाने के लिए समयसीमा बढ़ाए जाने संबंधी एसएफजे की अर्जी पर जज जेम्स ई बोसबर्ग ने 28 फरवरी को जारी आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता 14 अप्रैल 2014 तक तामील होने का सबूत पेश करेंगे या तामील के सिलसिले में हुई प्रगति के बारे में अदालत को अवगत कराने के लिए स्थिति रिपोर्ट पेश करें।
जब वित्त मंत्री थे
एसएफजे संस्था का आरोप है कि 90 के दशक में मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री होते हुए बगावत को दबाने वाले ऐसे कई सेना के ऑपरेशन को फंड दिया गया, जिसमें कई हजारों सिखों की जान गई। उनके इस कार्यकाल के अंतर्गत लोगों को मारा गया और यातनाएं दी गईं। एसएफजे के वकील गुरपतवंत सिंह पन्नुन ने कहा कि हाल ही में अमेरिका में जारी मानवाधिकार की सालाना रिपोर्ट भी हमारे आरोपों को सही साबित करती है। अमेरिका में एलेन टॉर्ट क्लेम ऐक्ट (एटीसीए) और टॉर्चर विक्टिम प्रोटेक्शन एक्ट (टीवीपीए) के तहत संघीय अदालतें विदेशों में हुए मानवाधिकार उल्लंघन के केस की सुनवाई कर सकती हैं।


