Published On:Saturday, March 1, 2014
Posted by NJFI media
सीने पर बोझ लिए चले गए बंगारू लक्ष्मण
नई दिल्ली: बंगारू लक्ष्मण का जन्म 1939 में आंध्र प्रदेश के एक मादिगा दलित परिवार में हुआ था. उन्होंने हैदराबाद से बीए एवं एलएलबी की डिग्री हासिल की. बंगारू लक्ष्मण काफी युवा अवस्था में ही राजनीति में शामिल हो गए थे. 1975 में आपातकाल के दौरान वह जेल भी जा चुके थे. बंगारू लक्ष्मण 1996 में राज्यसभा के लिए चुने गए. वह 1999-2000 तक रेल राज्यमंत्री थे.
इसके बाद बंगारू भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त हुए. हालांकि कुछ समय बाद ही वह तहलका द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में रिश्वत लेते पकड़े गए. बंगारू लक्ष्मण भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा कई और पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. स्टिंग आपरेशन में नाम आने के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था. बंगारू का कहना था कि उन्होंने पैसे पार्टी फंड के लिए लिए थे.
तहलका डॉट कॉम ने 13 मार्च 2001 को फर्जी रक्षा सौदे के स्टिंग ऑपरेशन का विडियो जारी किया था. खुफिया कैमरे में भाजपा नेता बंगारू लक्ष्मण रक्षा सौदे के फर्जी एजेंट से एक लाख रुपये लेते देखे गए.
इस स्टिंग ऑपरेशन में तहलका के पत्रकारों ने खुद को ब्रिटेन की एक फर्जी कंपनी वेस्ट एंड इंटरनेशनल का प्रतनिधि बताकर बंगारू लक्ष्मण से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि वो हाथ में थामे जा सकनेवाले उनके सैन्य उपकरण - थर्मल इमेजर - की सप्लाई के लिए रक्षा मंत्रालय में उनकी सिफारिश करें.
सीबीआइ की चार्जशीट के मुताबिक रक्षा सौदों के एजेंट के तौर पर तहलका के पत्रकारों ने बंगारू लक्ष्मण से 8 बार मुलाकात की. 13 मार्च, 2001 को सीडी जारी होने के बाद राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ था. जिसके बाद बंगारू को भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा.
सीडी प्रसारित होने के 11 दिन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश के. वेंकटस्वामी की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया.
बाद में वर्ष 2003 में न्यायाधीश वेंकटस्वामी के इस्तीफा देने के बाद जाँच का काम न्यायमूर्ति एस एन फूकन आयोग को सौंपा गया. लेकिन 2004 में आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही यूपीए सरकार ने फूकन आयोग को भंग कर जाँच का काम सीबीआई को सौंप दिया.
सीबीआई ने दिसंबर 2004 में बंगारू लक्ष्मण समेत पांच लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कई धाराओं में मामला दर्ज किया. दो साल बाद 2006 को बंगारू लक्ष्मण के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया.इसके छह साल बाद 2012 में उन्हें सजा सुनाई गई.
बंगारू लक्ष्मण ने हमेशा यही कहा कि उन्होंने पैसा पार्टी फंड के लिए लिया था. उन्हें इस बात का भी हमेशा मलाल रहा कि मुश्किल घड़ी में पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया. बंगारू वाकई घूसकांड के दोषी थे या छुद्र राजनीतिक साजिश के शिकार ये कभी साफ नहीं हो सका और यही बोझ लिए वो दुनिया से चले गए.


