Published On:Sunday, April 13, 2014
Posted by NJFI media
आत्म शुद्धि जयंती कब मनायेगे
उज्जैन। मानव अपने आप में महा कुटिल चतुर व चालाक है वह सभी को स्वंय को धोखा देने में भी नहीं हिचकत है वर्षभर में अगणित जयंतिया मनाता है चल समारोह निकालता है भण्डारे करता है, सुन्दरकांड करवाता है जोर जोर से नारे लगाता है और महा मस्तिकहोने का प्रदर्शन करता है औपचारिकता के निर्वान में सिद्ध हस्त हैं। वह सभी को ईश्वर व स्वंय को धोखा देने में भी सिद्धहस्त हैं। इन्सान दोहरा, दोगला व स्वता सुखायवादी चरित्र रखता हैं।
हम सब जंयतियाॅं मानते क्या यथार्थ में अस्तित्व व आध्यात्मिक है या नहीं। सत्य,ईमान, विश्वास लोक उद्धार व नियति श्रृगार में तनिक विश्वास नहीं ईश्वर को भी रिश्वत व धन देने की नाटक नौटंकी करते हैं और स्वंय को महा मक्कार व सम्पन्न जताते है। ईश्वर को ताले में बंद रखते है और स्वंय को उसका चमत्कार जताते है जयंतियाॅं मानने वाले ही बताये की आत्मा बोध जयंती कब मनाई, सच्चे उपवासी कब बने आत्म साक्षात्कार हुआ या नहीं सभी मौन हो जाते हैंसत्य सदा अप्रिय ही लगता है हम स्वंय को सुनहरा धोखा देते है इसी कारण समस्या ओं के मकडजाल जल में उलझे रहते है। सच्ची आत्म बोध जयंती मनाओ, अमूल्य रत्न पाओ और ईश्वरीय आभा मण्डल के अणु बना जओं।


