Published On:Sunday, April 27, 2014
Posted by NJFI media
आत्म हत्याओं व अपराधों का दौर
उज्जैन। आज का आदमी स्वंय को धन केन्द्रित कर रहा और उसकी आकाक्षाएं महत्वकाक्षाएं व धन भूख इतनी बढ चुकी है की वह धन विकृति एवं उसकेगंभीर परिणामोंसे ही नहीं डर रहा हैं। कर्ज, धन, लोभ, अति महत्वकाक्षओं पाश्चात्य, सभ्यता का अधानुकरण फैशन, परस्ती, दिखावे के कारण स्वंय अशांत रहता है और उसका मन विकृत एवं मष्तिष्क कमजोर क्षणों के चक्रव्यूमें फंसा रहता हैं। उसमें से न निकलपाने के कारण आत्म हत्या जैसा कू्रर अपहराध कर बैठता है इमली बाजार हादसा अति हृदय विदारक है अपने मासूम बच्चों को जहर देकर स्वंय पति पत्नि फांसी के फंदेपर झूल गए। एसेी कूरता दिमाी कमजोर क्षणेों में आती हैं। अन्य हत्या व वृक्ष की हत्या हेतु आय पी.सी. में दण्ड का कोई प्रावधन ही नहीं। आत्म असन्तोष, अति महत्वकाक्षाओं अयाशी, पूर्ण जीवन यापन भाव, नशा खोरी व धनकुबेर बनने का कुचरित्र महा भष्ट ही होता हैं। आत्म हत्या जैसा घिनौना अपराध अब फैशन बन गया हैं। सादा जीवन, उच्चा विचार अपने वर्तमान परिवेश से सन्तुष्टी ही जीवन का सन्मार्ग हैं। जो उसे अपनाता है वह बहुआयामी संकटों से मुक्त ही रहता हैं।


