Published On:Sunday, April 27, 2014
Posted by NJFI media
भानमती के कुनबे का भंगार भाजपा
उज्जैन। विगत तीन वर्षो से पॅंूजीपतियों, उद्योगपतियों, कालेधन कुबेरो, माफिया समूहो, संघ एवं भाजपा ने सत्ता अपहरण पॅंूजीवादी अर्थव्यवस्था स्थापना साम्प्रदायिकता अराजकता देश को गृहयुद्ध की आग में जलाने के षडयंत्र रचे। संघ योजनाकार व मोदी मुखौटा बना। पंथ निरपेक्ष दल व कांगे्रस व शातिर व कुटिलषडयंत्री से अनभिज्ञ रहे। देश के नौकरशाह भी षडयंत्र में सहयोगी रहे।
संघ व मोदी ने कांगे्रस को तोडने व मुस्लिमों में फूट डालने, दलितों को उकसाने, देश में साम्प्रदायिकता फैलाने की कुनीति अपनायी हजारों करोड की सहायता स्वदेशी आतंकियों ने दी भाजपा में कमल कांगे्रस बनने की प्रक्रिया को मूर्तरूप दिया। गुजरात में16 दिग्गज कागे्रसी नेताओं कोे भाजपा में लाया गया व उन्हें प्रत्याशी बनाया वह दिग्गज भाजपाई नेताओं की उपेक्षा की गई यही हाल म.प्र. में हैं। ताजा घटना मनमोहन के भाई कोहली की है, जेटली के माध्यम से विशेष डील द्वारा भाजपा में लाया गया। बिहार में भी जदयू के नेताओं को भाजपा में लाया। मोदी के भुगतान हेतु मदनी व अन्य नेताओं को अनुबंधित कर उनके प्रायोजित बयान दिलवाये गए। इंकाईयों को भाजपा में लाकर विशेष महत्व दिया जा रहा। पासवान भी भाजपा में आ गए। मनमोहनसिंह को भीभाजपा में ले आये सभी दलों के नेताओं को भाजपा में लाकर भाजपा बनायी जा रही चाहे जो और जैसा भी हो नमा का नाम जपे और भाजपाई हो जाए। मोदी, मोदी गेंग और संघ ने कही की ईट, कही का रोडा और भानमती काा कुंनबा जोडा, वाली कहावत को चरितार्थ किया हैं। भाजपा को काकटेल पार्टी बनायी और कमल कांे्रस का नया नाम दिया। दलजीत कोहली मनमोहन घर की ईट है या रोड य कचरा जेटली या मोदीही जाने, किन्तु भाजपा ने उन्हें अपनी शोभा बनाया।
अब तो भाजपा भनमती के कुनबे का भंगार हीहो गई हैं। कमलकांगे्रसी असलीभाजपा के शरीर की कालीकोढ और नकली भाजपा की भाग्यरेखा बने हुए है। वैसे भी देश मेंभंगार के भावों में भी भारी वृद्धि हुई, भंगार भाजपा चमकीली जरूर नीं आ रही है किन्तु अंदर से काली हैं। अटल जैसा पारस भी भाजपा में नहीं है जो भंगार भाजपा को स्वर्णिम बना दे। मोदी तो बल्ब है किन्तु शोपीस के रूप में टंगा हुआ हैं। भंगार भाजपा को अंबानी, अडाणी कालेधन कुबेरों व कारपोरेट जगत ने भारी मोटे माल में खरीदा हैं। यदा कदा भंगार मेंभी अच्छी वस्तुए मिल जाती हैं। किन्तुभंगार भाजपा में उसके भी अवसर नहीं हैं। अंबानी अडवाण्ी व कारपोरेट व कालेधन कुबेर, उसे अपने अपने गोदामों व जेबों में स्टाक रूप में रखेगे ही। भंगार भाजपा का मूल्य ही समाप्त हो गया हैं। सत्ता सुन्दरी ने भी निगाहे फेरली हैं।


