Published On:Saturday, April 12, 2014
Posted by NJFI media
बद्री केदार व महाकाल तो सैर सपाटे के केन्द्र बने
उज्जैन। गलत धारणाओं व विश्वास में स्वंय को प्रधानमंत्री मानने वाले अंकारी, मदांध, पूर्वाग्रही, शाब्दिक झूठेला, गपोडी
व सर्व अपमानतक मोदी अब वैचारिक, मष्तिष्क एवं भावनात्मक रूप से विक्षिप्त नजर आ रहा। पुरी की सभा में राहुल की
आलोचना करने में मोदी बद्री केदार व महाकालतथा सनातन धर्म का फिर अपमान कर बैठे वाराणसी में आद्यदेव शिव व
सनातन धर्म का अपमान किया था, वही कुकृत्य पुरी मंे किया। बद्री केदारेश्वर व महाकाल को मनोरजंनी टूरिज्म
स्पाटबताया। नाजीवादी ऐसी दीमक है जो गीता, कुरान, आराधना, स्थल, भावनओं आस्था व विश्वास तक खा जाती ै
मोदी ने सत्तामद में विवेकानंद के विचारों, सिद्धांतों व निर्णयों की हत्या में भी तनिक संकोच नहीं। वही, केदार,
महाकाल, मक्का, मदीन, गुरूद्वारे महाकाल व आराधन स्थल ईश्वर सैनिकों के विश्राम गृह हैं। उनको नमन करने, दर्शन
करने से आत्म संतुष्टी मिलती हैं। वे टूरिज्म स्पाट नहीं है आत्मिक भावनाओं के केन्द्र हैं। मदांध मोदी शाब्दिक लफाजी
कर सकते है, किन्तु वे अज्ञानी है। लोक भावनाओं, आस्था विश्वास, सम्प्रदायिक सद्भाव, एकता, विश्वास इंसानों की
बलि चढाना अपना धर्म ही मानते हैं। पुरी सभा का बयान उपरोक्त बात का स्वंय सिद्ध प्रमाण हैं।
देश में संस्कृति, सभ्यता, देशभक्ति, देशवाद, आध्यात्म व सुसस्कार के ठेकदार का मुखौटा नाजीवादी मोदी है, वाराणसी
में शिव व सनातन धर्म के अपमान तथा पुरी मेें बद्री केदार को टूरिज्म स्पाट बताने वाले मदांध मोदी के बयान पर मौन
क्यों साधा। क्या संघ का मुखौटा मोदी आद्यदेव शिव, सनातन धर्म, बद्री केदार व अन्य आराधना स्थलों का अपमान कर
रहे हैं, तथा कोटि-कोटि भक्तों का अपमान करते रहे और सभी मौन ही रहेे विहिप के मुॅंह पर तालेक्यों?
लगता है सभी धन विकृति के शिकार होकर अचंेत हो गए है अब देश की आस्थावान कोटि कोटि जनता मोदी को संदेश्
दे रही है कि महा मक्कार धूर्त, अहंकारी, पूर्वाग्री,गपोडी, अज्ञानी फेकू, झूठेले तथा सत्ता के भूखे भेडिये को जनता कभी
स्वीकार नहीं करेगी। देश के सभी पंथों की जनता, मोदी का राजनैतिक दाह सस्कारकर अपना देश व आध्यात्मिक धर्म
निभाएॅं।

