Published On:Sunday, April 6, 2014
Posted by NJFI media
मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के लिए नुकसानदेह!
वॉशिंगटन : भारत और अमेरिका के कई प्रमुख अधिकारियों और विशेषज्ञों ने मोदी सरकार को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए नुकसानदेह बताया है. इन अधिकारियों ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि भारत में बीजेपी की अगुआई वाली मोदी सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के बुनियादी हितों के लिए नुकसानदेह साबित होगी. वहीं अमेरिकी संसद की अब तक की पहली हिंदू सांसद तुलसी गैबार्ड ने इसका विरोध किया.
तुलसी ने कहा, 'मैं नहीं मानती कि इस सुनवाई का समय कोई संयोग है. भारत में राष्ट्रीय चुनाव सोमवार को शुरू होंगे और 12 मई तक चलेंगे. मैं चिंतित हूं कि इस सुनवाई का लक्ष्य भारत के राष्ट्रीय चुनाव के नतीजे को प्रभावित करना है, जो अमेरिकी संसद की कोई उचित भूमिका नहीं है.'
भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की खराब हालत पर अमेरिकी संसद के टॉम लैंटोस ह्यूमन राइट्स कमिशन के सामने अपनी बातें रखते हुए अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) की उपाध्यक्ष कटरीना लैंटोस ने कहा कि उनका आयोग भारत के हालात पर करीब से नजर रख रहा है.
कटरीना ने कहा, 'ढेर सारे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों ने यूएससीआईआरएफ को बताया है कि उन्हें डर है कि बीजेपी की जीत और देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का चुनाव उनके लिए और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए नुकसानदेह होगा.' बीजेपी ने 1998 और 2004 के बीच केंद्र में सरकार का नेतृत्व किया था.
कटरीना ने कहा कि यूएससीआईआरएफ लंबे समय से हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों के साथ बीजेपी और मोदी के निकट संबंधों पर चिंता जाहिर करता आया है. उन्होंने कहा कि इन समूहों, खासकर अतिवादी अजेंडा या अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के इतिहास वाले संगठनों की गतिविधियां अक्सर देश में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं.'
यूएससीआईआरएफ उपाध्यक्ष ने कहा कि इनमें से ढेर सारे समूह संघ परिवार के बैनर तले हैं. उनमें विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समेत करीब 30 संगठन हैं. उन्होंने कहा, 'संघ परिवार आक्रामक रूप से ऐसी सरकारी नीतियों के लिए जोर डालते हैं जो हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडा को बढ़ावा दे और अलग-अलग हद तक हिंदुत्व की विचारधारा से जुड़े हों, जो गैर-हिंदुओं को विदेशी करार देती है.'

