Published On:Monday, April 7, 2014
Posted by NJFI media
गिड़गिड़ाते रहे धमाके में घायल डिप्टी कमांडेंट, किसी ने नहीं सुनी, शहीद हुए तो दिया 'गार्ड ऑफ ऑनर'
रांची. दूसरों की सुरक्षा के लिए जान दांव पर लगा कर बम डिफ्यूज करने गए सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट इंद्रजीत सिंह घायल होकर मदद के लिए तड़पते रहे तो किसी ने नहीं सुनी। अब जब वह शहीद हो गए हैं तो उन्हें रांची में गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया (ऊपर देखें तस्वीर)। इंद्रजीत के श्वसुर डॉ. पारसनाथ सिंह, साले सत्येंद्र व अन्य परिजनों ने आरोप लगाया कि देश के नेता मजे लूटते हैं, पर जवान व अफसर सुई-दवा के बिना तिल-तिल कर मर रहे हैं। इंद्रजीत के साथ दो जवान भी शहीद हो गए हैं और आठ घायल हुए हैं।
कैसे हुआ यह
बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों द्वारा रखे गए केन बम डिफ्यूज करने के दौरान हुए धमाके में घायल डिप्टी कमांडेंट इंद्रजीत इलाज के लिए गुहार लगाते रहे, पर दो घंटों तक किसी ने सुध नहीं ली। वह लहूलुहान हो गए थे। जख्मी होने के दो घंटे बाद तक औरंगाबाद सदर अस्पताल में तड़पते रहे। मीडिया के कैमरों के सामने बोलते रहे, पर कोई सुन नहीं रहा था। 'कोई डीजीपी को बताओ। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को बताओ। मेरे पास दो घंटे से कोई डॉक्टर नहीं आया। मैं दो घंटे से तड़प रहा हूं। मेरे शरीर का पूरा खून बह रहा है। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं। मुझे बचा लो, मैं मर जाऊंगा...'' बुरी तरह से रोते हुए इंद्रजीत बार-बार परिवार को याद कर रहे थे। मदद की गुहार लगा रहे थे। लेकिन, किसी ने नहीं सुनी।
औरंगाबाद में नक्सलियों द्वारा वोट के बहिष्कार की धमकी के बाद इंद्रजीत के नेतृत्व में सीआरपीएफ की टीम वहां पहुंची थी। इन्हें आठ-आठ किलो के दो केन बम बीच सड़क पर मिले। ढिबरा थानाक्षेत्र के बरंडा मोड़ के पास इन बमों को डिफ्यूज करते समय धमाका हो गया। जिसमें डिप्टी कमांडेंट इंद्रजीत, जवान पवन कुमार (राजस्थान) और टी पन्ना (आंध्र प्रदेश) की मौत हो गई। आठ अन्य जवान घायल हो गए। घायलों में ढिबरा थानाध्यक्ष अमर चौधरी, सीआरपीएफ इंस्पेक्टर तारसेम सिंह व जवान वीरेंद्र कुमार, विजय कुमार, दिलीप कुमार, अशोक कुमार, राजवीर सिंह व बिहार पुलिस के अजय कुमार शामिल हैं। जवानों का कहना है कि प्रेशर बम फटने से हादसा हुआ। घायलों को एएनएमसीएच में भर्ती किया गया।
लोगों की जान बचाने निकले इन जवानों की मदद में घटना के दो घंटे बाद हेलिकॉप्टर मौके पर पहुंचा। घायल अवस्था में इंद्रजीत को रांची ले जाया गया। वहां भी दो घंटे तक अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले। उन्हें खून चढ़ाने का इंतजाम नहीं हो सका और इंद्रजीत ने परिवार को याद करते हुए दम तोड़ दिया। इंद्रजीत के अलावा सीआरपीएफ के दो जवान भी शहीद हो गए हैं।
इंद्रजीत के परिजनों ने बेहतर चिकित्सा के लिए उन्हें पटना के बदले रांची ले जाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पहले भी घायल हुए जवानों का इलाज पटना के प्राइवेट हॉस्पिटल में कराया गया है।

