Published On:Sunday, May 4, 2014
Posted by NJFI media
भगवान परशुराम सव पंथों की विभ्ूति लोक कल्याण व सरक्षण मुख्य ध्यये था
उज्जैन। महाशक्तिमान, महायोगी एवं लोकउद्धारक व संरक्षक थे भगवान परशुराम। सामाजिक न्याय व सर्व उद्धारक चरित्र, उनकी विशेषता थी। भगवान परशुराम महाशक्तिमान थे उनके फरसों ने देवदानव रूप में अन्यायी, शोषकों, अत्याचारियों व कू्रर चेहरों का वध किया जो मानव संरक्षण हेतु अनिवार्य था। भगान परशुराम के आद्यदेव शिव थे। आद्यदेव से उनक सीधा संवाद सम्पर्क था। पृथ्वी को अन्यायियों शोषकों से मुक्त करने हेतु महावध का चरित्र अपनाया। वे महायोगी थे उनके हत्याओं के पाप का संज्ञान था महाकाल की नगरी के वन क्षेत्र में पापों से मुक्ति हेतु उज्जैन स्थिति रामेश्वर के समक्ष बैठ कर तपस्या की यह अति पुरातन मंदिर 84 महादेव के 29 वे क्रम में अंकित हैं। यह मंदिर हरे पत्थरों की पहाडी पर स्थित था और आज भी हैं। इसी मंदिर में भगवान नृसिंह व भगवान परशुराम की अतिप्राचीन मूर्ति भी स्थापित हैं। अति प्राचीन व आध्यात्मिक मदिर को क्षेत्रवासियों ने अच्छे स्वरूप मं सजा कर रखा है किन्तु परशुराम जयंती पर भगवान परशुराम की तपस्या स्थली रामेश्वर महादेव व भगवान परशुराम की अति प्राचीन मूर्ति ब्राम्हण समाज एवं चल समारोह निकालने वाले विस्मृत ही करते रहते हैं।
भगवान परशुराम की तपस्थली उज्जैन में भगान परशुराम की सच्ची पूजा आराधना की बजाय दिखवा किया जाता है और भगवान परशुराम की तपस्या स्थली की उपेक्षा की जाती हैं।


