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Published On:Saturday, July 5, 2014
Posted by NJFI media


    सरगुजा विश्वविद्यालय की मन मानी और सुस्त       छात्र संगठनों के बीच पिसता छात्रों का भविष्य

एनजेएफआई/छत्तीसगढ़/सरगुजा/ कन्हैयालाल यादव की रिपोर्ट:- एक बार फिर सरगुजा विष्वविद्यालय अपने छात्रों को निराश करने में पूर्ण रूप से सफल रहा है। वि. वि. ने षिक्षा सत्र  2013-14 का परिणाम घोषित कर यह जता दिया है कि वि.वि. में छात्रों के बेहतर भविष्य से संबंधित कोई ठोस योजना या फिर यूं कहें कि किसी प्रकार की कोई जिम्मेदारी ही नहीं है।
    2013-14 के षिक्षा सत्र के लगभग सभी परीक्षा परिणाम छात्रों के साथ हुए भेद-भाव को उजागर करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते। वि.वि के द्वारा जारी परीक्षा परिणामों को देख कर ऐसा लगता है कि उत्तर पुस्तिका की जांच करने वाली टीमों ने सारे नियम कायदों को ताक पर रखते हुए छात्रों का भविष्य निर्धारित किया हो।
    अगर हम केवल बी.काॅम के परिणामों की ही बात करें तो ऐसे कई छात्र आसानी से मिल जाऐंगे जिन्हें केवल एक -दो नम्बरों के लिए फेल-या पूरक घोषित कर दिया गया है, दूसरी तरफ बी काॅम के ही परीक्षा परिणामों में ऐसे भी छात्र है जिन्हें एक-दो नम्बर ग्रेस में देकर पास किया गया है।
    छात्रों के साथ इस प्रकार का भेदभाव सरगुजा वि.वि. में कार्यरत आधिकारियों-कर्मचारियों के स्वयं की योग्यता पर प्रष्नचिन्ह अंकित करता हुआ नजर आता है।
    पूरे वर्ष भर पढ़ाई करने के बाद भी अगर कोई छात्र-छात्रा 1-2 नम्बर के लिए फेल हो जाते हैं तो ऐसे सवाल उठना लाजमी होते हैं कि जो छात्र प्रत्येक प्रष्न पत्र पर निर्धारित अंकों तक अंक पाने में सक्षम साबित होता है वह एक-दो नम्बरों के लिए कैसे चूक कर सकता है।जबकि उसी छात्र-छात्रा के साथ पढ़ने वाला दूसरा विद्यार्थी निर्धारित अंकों से कम अंक पा कर 1-2 अंक ग्रेस पा उत्तीण हो जाता है। वि.वि. के ऐसे रवैये से ही छात्रों के मन में हिनता का जन्म होता है जो छात्रों को अमानवीय कदम उठाने को विवश करने लगता है।

अतिरिक्त कमाई का जरिया-परीक्षा में फेल हो चुके छात्र या पूरक आये छात्रों के द्वारा अपनी परीक्षा काॅपी के पुनः मूल्यांकन या पुनः जांच के लिए वि.वि. में आवेदन करना छात्रों की मजबूरी बन जाती है, जिसके बदले में छात्रों को वि.वि के नाम पर 100-200 रू की डी.डी. बनवानी पड़ती है। वि.वि. इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि उसके द्वारा छात्रों को 1-2 नम्बर से फेल या पूरक करने पर छात्र वि.वि. के पास पुनः मूल्यांकन व पुनः जांच के लिए आवेदन जरूर करेगें। जिसके बदले वि.वि. को छात्रों से अतिरिक्त कमाई करने का मौका मुफ्त में  घर बैठे मिल जायेगा। इनकी ऐसी सोच का फायदा निजी कालेज वाले भी उठाने से बाज नहीं आते।

उदासीन छात्र संगठन-    सरगुजा संभाग में सक्रिय राष्ट्रीय स्तर के छात्र संगठन भी ऐसे मामलों में उदासीन ही नजर आते हैं। उनकी सक्रियता तब नजर आती है, जब उनके संगठन में कार्यरत किसी छात्र के साथ उक्त बातें घटित होती हों या फिर तब जब  उनका कोई अपना पीडि़त होता हो। गैर राजनीतिक छात्रों के प्रति छात्र संगठन भी कोई जिम्मेदारी उठाता नजर वहीं आता। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि छात्रों के हित में आवाज उठाने का दम भरने वाले संगठन क्या केवल अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए ही छात्रों के साथ होने का दावा किया करते है?

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