Published On:Sunday, July 13, 2014
Posted by NJFI media
पंजीयन विभाग पर आधारहीन आरोप न लगायेंः काशीनाथ तिवारी

एन.जे.एफ.आई.छत्तीसगढ़/सरगुजा/अम्बिकापुर - संभागीय मुख्यालय अम्बिकापुर में अचल सम्पदा की खरीद बिक्री से संबंधित नियमों के तहत सौदों का पंजीयन करने वाले विभाग पर दलाली को प्रश्रय देने और सरकारी भूखंडों के विक्रय में भी संलिप्त रहने के आरोपों को सरासर भ्रामक और बेबुनियाद निरूपित करने हुए दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष काषीनाथ तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिऐ यह स्पष्ट किया है कि अगर पंजीयन के लिए तथ्यों को छिपाकर कूटरचित दस्तावेज पेष किए जाते हैं तो इसमें विक्रेता सा क्रेता का ही स्वार्थ निहित होता है। इसमें पंजीयन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी किसी भी रूप में दोषी नहीं माने जा सकते।
श्री तिवारी के अनुसार, कोई भूमि षासन से प्राप्त भूमि है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी हल्का पटवारी के बी-वन, खसरा पंचसाला में रोस्टर रहता है साथ ही क्रेता-विक्रेता भी सारी असलियत से वाकिफ रहते हैं। पक्षकारों को विक्रय पत्रक में भी भूमि की स्थिति दर्ज करते हुए घोषणा करनी होती है कि सौदे में छत्तीसगढ़ भूराजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (6) का उलंघन नहीं किया गया है (और) यदि ऐसा पाया गया तो क्रेता एवं विक्रेता उत्तरदायी होंगे।ऐसे में पंजीयन विभाग पर अंगुली उठाया जाना कतई तर्कसंगत नहीं लगता।
दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि अवैध प्लटिंग किए जाने और षासकीय भूमि पर कब्जा किए जाने जैसी कारगुजारियों के खिलाफपंजीयन विभाग कुछ नहीं कर सकता। फिर भी ंपजीयन पदाधिकारी अगर किसी प्रस्तुत दस्तावेज पर षक जाहिर करते हैं तो पक्षकार उन पर अनर्गल आरोप लगाने लगते हैं जिनका कोई आधार नहीं। होता। अगर गलत जानकारी देकर दस्तावेजों क पंजीयन कराया जाए, अवैध प्लाटिंग कर टुकड़ों में भूखंड बेचे जाएं या षासकीय भूमि की खरीद फरोख्त हुई हो तो जांच के बाद वह दस्तावेज न सिर्फ षून्य और अकृत मान लिया जाता है बल्कि दोषी को इंड भी दिया जाता है। काषीनाथ तिवारी ने खरीददारों को सलाह दी है कि जमीन खरीदने से पहले पटवारी के अभिलेखों का निरीक्षण करके लिखित जानकारी लेकर ही खरीद सम्पन्न करें। 0 अलख मिश्र 0

