Published On:Wednesday, October 9, 2013
Posted by NJFI media
लॉबिंग को कानूनी दायरे में लाने पर विचार संभव
रिटेल एफडीआई मामले में वालमार्ट की तरफ से लॉबिंग पर हो-हल्ला के बाद सरकार इस पर कर सकती है विचार
मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में वालमार्ट की तरफ से लॉबिंग पर हो-हल्ला के बाद सरकार अब लॉबिंग को कानूनी दायरे में लाने पर विचार कर सकती है। भारत में अभी लॉबिंग को गैर कानूनी माना जाता है।
मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में वालमार्ट की तरफ से लॉबिंग पर हो-हल्ला के बाद सरकार अब लॉबिंग को कानूनी दायरे में लाने पर विचार कर सकती है। भारत में अभी लॉबिंग को गैर कानूनी माना जाता है।
कैबिनेट की अगली बैठक में वालमार्ट की लॉबिंग को लेकर पूर्व न्यायाधीश मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सरकार लॉबिंग के मसले को कानूनी चोला पहनाने पर आगे बढ़ सकती है।
इस कमेटी की रिपोर्ट पर पिछले गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में चर्चा होनी थी, लेकिन इसे अगली बैठक के लिए टाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक न्यायाधीश मुद्गल की रिपोर्ट में वालमार्ट की लॉबिंग को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी प्रमाण और ठोस साक्ष्य के अभाव में किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है और यह नहीं कहा जा सकता है कि वालमार्ट की तरफ से लॉबिंग को लेकर घूस देने का काम किया गया या नहीं। कैबिनेट की अगली बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार की तरफ से कार्रवाई रिपोर्ट तैयार की जा सकती है या कार्रवाई को लेकर सिफारिश की जा सकती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि न्यायाधीश मुद्गल की इस रिपोर्ट को संसद के समक्ष भी रखा जा सकता है क्योंकि वालमार्ट की तरफ से लॉबिंग किए जाने के मामले में सरकार ने संसद में तय सीमा में इसकी जांच कराने की घोषणा की थी। संसद में हो-हल्ला के बाद ही इस साल जनवरी में कैबिनेट की तरफ से मुद्गल कमेटी का गठन किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, इस रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार लॉबिंग को कानूनी दायरे में लाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

