Published On:Wednesday, December 4, 2013
Posted by NJFI media
25 सीटें, बीएसपी फैक्टर, 'नोटा' का असर और युवा वोटर कर सकते हैं दिल्ली में उथल-पुथल
- दिल्ली में इस बार किसकी सरकार बनेगी, इसका फैसला बुधवार को जाएगा और आठ दिसंबर को जगजाहिर भी हो जाएगा। देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली के विधानसभा चुनाव को एक तरह से देश के सियासी मूड का संकेत के रूप में देखा जाता है। कभी अन्ना हजारे के बेहद करीबी रहे अरविंद केजरीवाल की सियासी मैदान में एंट्री से दिल्ली का चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। केजरीवाल का राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी (आप) इस बार दिल्ली में सरकार बनाने का दावा कर रहा है तो सत्तारुढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी बीजेपी ने भी जमकर सियासी ताल ठोंकी है। ऐसे में दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणामों को लेकर बेहद दिलचस्पी देखी जा रही है।
- दिल्ली में कांग्रेस, मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा और एक साल पहले गठित हुई 'आप' के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। चुनाव में प्रत्याशियों को जिताने के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित कई नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। तो, भाजपा ने अपने स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को चुनाव प्रचार के अंतिम समय में बुलाकर मुकाबला रोमांचक बना दिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज सहित आला नेताओं ने भी जमकर प्रचार किया। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, योगेन्द्र यादव सहित आला नेताओं ने भी दिल्ली की गलियों में खूब प्रचार किया।
- इन दलों के अलावा बीएसपी सुप्रीमो मायावती और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, शरद यादव ने भी अपने प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली में कई दिनों तक डेरा डाले रखा। इनके अलावा समाजवादी पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव, एनसीपी नेता तारिक अनवर सहित अन्य कई नेताओं ने भी चुनाव प्रचार किया।


