Published On:Monday, December 16, 2013
Posted by NJFI media
दिल्ली गैंगरेप के एक साल बाद: कितनी बदली है दिल्ली?
- नई दिल्ली। दिल्ली के वसंत विहार इलाके में 16 दिसंबर 2012 को 23 साल की छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने सारे देश को सदमे में डाल दिया था। आज उस दर्दनाक वारदात को एक साल हो चुका है। उस घटना के बाद पूरे देश में एक क्रांति की लहर दिखाई दी थी। लाखों की तादाद में लोग इंसाफ की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए थे। न्याय के लिए चलाई गई लोगों की इस मुहिम ने एक सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की हिलाकर रख दिया था। रेप की राजधानी बनी दिल्ली को बदलने की जीतोड़ कोशिश भी की गई, लेकिन आज भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सही मायने में बदली है दिल्ली? क्या आज महिलाओं को मिल पाई है वो 'बेखौफ आजादी' जिसमें वह खुलकर सांस ले सकें?
- शायद नहीं, दैनिक जागरण की टीम ने दिल्ली के कुछ इलाकों में महिला सुरक्षा को लेकर लड़कियों से बातचीत की। उनका कहना है कि आज भी दिल्ली में सुरक्षा की कमी है। अगर हम हाल ही में कनाट प्लेस में हुई घटना को ही ले लें तो वहां कि लड़कियां बताती हैं कि वे 8 बजे के बाद सड़क पर नहीं निकल सकती हैं। उन्हें ऐसी नजरों का सामना करना पड़ता है जैसे उनका चीरहरण हो रहा हो। यही नहीं साकेत इलाके की लड़कियां बताती हैं कि रात में तो दूर की बात है, वे दिन में भी बाहर निकलने से डरने लगी हैं।
- दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस-प्रशासन और कानून में भले ही कई बदलाव किए गए, लेकिन दिल्ली पुलिस का रवैया आज भी वैसा ही ठंडा है। सरकार ने रेप से संबंधित कानूनों में भले ही संशोधन के प्रावधान लाए हों, लेकिन इन सबके बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
- दिल्ली के लाजपत नगर में रहने वाली लड़कियों का मानना है कि कहीं कोई भी बदलाव लाने से पहले ज्यादा जरूरी है अपने अंदर बदलाव लाने की। उनका मानना है कि समाज की सोच और नजरिए में बदलाव जरूरी है। उसके बाद ही कोई तस्वीर बदल सकती है। आज भी क्यों वे जब सड़क पर निकलती हैं तो उन्हें उन गंदी नजरों का सामना करना पड़ता है? क्यों आज भी उन्हें ही रेप के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है? घर हो या ऑफिस हर जगह उन्हें मानसिक और शारीरिक बलात्कार का शिकार होना पड़ता है।


