Published On:Thursday, December 19, 2013
Posted by NJFI media
जहाँ पत्रकारों के लिए है इधर कुँआ, उधर खाई..
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में माओंवादियों ने पिछले दिनों एक पत्रकार की हत्या कर दी. उसके बाद पत्रकारों ने माओवादियों की खबरों का बहिष्कार करने का फ़ैसला किया है.
मगर इस पूरे घटनाक्रम की पर्तें हटाई जाएँ तो एक बड़ी समस्या से
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उस इलाक़े से रिपोर्टें भेजने वाले पत्रकारों की मुश्किल दंतेवाड़ा से प्रकाशित एक दैनिक अख़बार के संपादक सुरेश महापात्रा एक लाइन में सामने रख देते हैं.
क्लिक करें 'नक्सली हमले' में पत्रकार की मौ
सुरेश कहते हैं, “हमारे लिए तालिबान जैसे हालात हैं. माओवादियों की ख़बरें छापें तो कहा जाता है कि हम माओवादियों का प्रचार कर रहे हैं और पुलिस की ख़बरें छापें तो माओवादी हमें पुलिस का दलाल और मुख़बिर घोषित कर देते हैं.”
इसी महीने की छह तारीख़ को बीजापुर ज़िले में संदिग्ध माओवादियों ने स्थानीय पत्रकार साई रेड्डी की हत्या कर दी थी.
इसके बाद बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, बीजापुर और कांकेर ज़िले के पत्रकारों ने माओवादियों की ख़बरों के बहिष्कार का फ़ैसला किया.सामना होता है
.
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सुरेश कहते हैं, “हमारे लिए तालिबान जैसे हालात हैं. माओवादियों की ख़बरें छापें तो कहा जाता है कि हम माओवादियों का प्रचार कर रहे हैं और पुलिस की ख़बरें छापें तो माओवादी हमें पुलिस का दलाल और मुख़बिर घोषित कर देते हैं.”
इसी महीने की छह तारीख़ को बीजापुर ज़िले में संदिग्ध माओवादियों ने स्थानीय पत्रकार साई रेड्डी की हत्या कर दी थी.
इसके बाद बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, बीजापुर और कांकेर ज़िले के पत्रकारों ने माओवादियों की ख़बरों के बहिष्कार का फ़ैसला किया.सामना होता है
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