Published On:Wednesday, December 4, 2013
Posted by NJFI media
नौ सेना दिवस : जज्बा लहरें व दुश्मनों को हिलाने का
- जयपुर। देश की तटवर्ती सीमाओं को समुद्री डाकुओं से बचाने के लिए गठित की गई भारतीय नौसेना आज ताकतवर और दुश्मनों को थर्राने वाली शक्ति बन चुकी है। भारत की सात हजार किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा की रक्षा भारतीय नौसेना पूरे जज्बे से कर रही है। समुद्र की लहरों के ऊपर और नीचे नौसेना हरदम मुस्तैद रहती है।
- लेकिन समय की बढ़ती रफ्तार के साथ कदम न बढ़ाने के चलते वह सुविधाओं में भी पिछड़ गई है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि वर्ष 2008 में समुद्री रास्ते से पाकिस्तान से घुसपैठ करके आए आतंकियों ने देश की व्यापारिक राजधानी मुंबई के वजूद को हिला कर रख दिया। इस बर्बर हमले में 166 मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। नौ सेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी ने भी इसी तरह के हमलों की आशंका जताई है। नौ सेना दिवस की पूर्व संध्या पर एडमिरल जोशी ने मंगलवार को चेतावनी दी कि कुछ देशों की अनियमित निजी नौकाओं के चलते देश को खतरा है, इनसे 26/11 जैसे हमले होने होने की आशंका है।
- कहते हैं कि जब जागे तब ही सवेरा। इसी तर्ज पर भारतीय नौसेना भी अपनी कायापलट कर रही है। साल 2013 उसके लिए इस मायने में बेहतरीन रहा। इस साल नौसेना ने कई अभूतपूर्व कदम उठाए । चाहे वह रक्षा सैटेलाइट जीसैट-7 हो, विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य हो या फिर स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत। इन्हीं प्रयासों को मद्देनजर रखते हुए नजर डालते हैं भारतीय नौसेना की रूपरेखा पर। क्योंकि 4 दिसम्बर को नौ सैना दिवस भी है।
- ऎसे बढ़ती गई पानी के सेना की कहानी
- भारतीय नौसेना का इतिहास सन् 1612 से शुरू होता है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने समुद्री डाकुओं से बचाव के लिए 5 सितंबर 1612 को लड़ाकू जहाजों की पहली स्कवॉड्रन का गठन किया। 1863 से 77 के बीच इसका नाम बॉम्बे मैरीन किया गया। बाद में इसे रॉयल इंडियन मेरीन कहा जाने लगा।
- वर्ष 1934 में इसका नाम फिर बदला गया। यह रॉयल इंडियन नेवी बन गई। दूसरे विश्व युद्ध के समय इसमें आठ वॉरशिप थे। आजादी के समय इसमें 32 पुरानी नावें और 11 हजार अधिकारी थे। 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बनने के बाद इसमें से रॉयल हटा दिया गया। भारतीय नौ सेना के पहले कमांडर इन चीफ सर एडवर्ड पैरी थे। इसके बाद 1955 में एडमिरल पीजे पहले चीफ ऑफ नेवल स्टाफ बने।
- 22 अप्रेल 1958 को वाइस एडमिरल आरडी कटारी चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ बनने वाले पहले भारतीय थे। सब लेफ्टिीनेंट डीएन मुखर्जी पहले कमिशंड भारतीय थे, जो इंजीनियर ऑफिसर के रूप में 1928 में शामिल किए गए।
- कम नहीं है हमारी ताकत
- सैन्य बल : भारतीय नौसेना मारक क्षमता और कार्मिकों की दृष्टि से दुनिया में पांचवे स्थान पर है। पहले पायदान पर अमरीका जबकि रूस और चीन क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। पाकिस्तान इस दृष्टि से दुनिया में 12 वे नंबर पर हैं। भारतीय नौ सेना में 58 हजार 350 कार्यरत और 55 हजार रिजर्व कर्मी है।
- विमानवाहक पोत : भारतीय नौसेना ताकत में किसी अन्य देश से पीछे नहीं है, बल्कि कई विभागों में तो वह विकसित देशों से आगे हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बी क्षमता में भारत अपने पड़ोसी देशों पर भारी पड़ता है। भारत के पास एक कार्यशील विमानवाहक पोत हैं। हाल में आईएनएस विक्रमादित्य के शामिल होते ही भारत इस श्रेणी में कई गुना आगे निकल गया।
- विक्रमादित्य के अलावा भारत के पास आईएनएस विराट भी सेवारत है। विक्रमादित्य पर अत्याधुनिक मिग 29 के विमानों का स्क्वॉड्रन तैनात रहेगा, जिसे हाल ही नौ सेना को सौंपा गया है। सी-हैरियर जैसे अन्य विमानों को भी विक्रमादित्य पर तैनात किया जाएगा। विक्रमादित्य 45 हजार 300 टन भार वाला, 284 मीटर लम्बा और 60 मीटर ऊंचा युद्धपोत है।


