Published On:Thursday, December 19, 2013
Posted by NJFI media
शुभ -विचार
1. अगर आप सदा स्वयं
की दूसरी की साथ तुलना करते रहते हैं तो आप
अवश्य ही अहंकार अथवा र्इष्र्या के शिकार
हो जायेंगे ।
2. अच्छी पुस्तकें अच्छे साथी की तरह हैं ।
अश्लील सहित्य हमारे मन को दूषित
करता है तथा हमें गलत रास्ते की ओर अग्रसर
करता है ।
3. समस्यायें चाहे कैसी भी हों, परन्तु इनसे घबराइये
मत, बलिक इन्हें परीक्षा समझ कर पास
कीजिये ।
4. जीवन को आबाद करना है तो मैं कौन हूं ? इस
पहेली को हल कीजिये । मैं और मेरे-पन के भान से
मुक्त हो जाइये ।
5. ज्ञान सबसे बड़ा धन है । स्वयं से पूछें - ''मैं
कितना धनवान हूं ?
6. यदि आपके मुख से गन्दे बोल निकलते
हैं तो आपका मन कैसा होगा ?
7. हमारे वचन चाहे कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हों,
दुनिया हमें हमारे कर्मों के द्वारा पहचानती है
।
8. यदि आप मत्यु से भयभीत होते हैं तो इसका अर्थ
यह है कि आप जीवन का महत्व ही नहीं समझते
।
9. आप अपने अधिकारों के प्रति ही जागरुक न
रहें अपितु इस बात का भी ध्यान रखें
कि आप सही मार्ग पर हैं या नहीं ।
10. अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से
आपमें अहंकार आ सकता है, परन्तु आध्यातिमक
ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते हैं
उतनी नम्रता आती है ।
11. आप किसी समस्या के बारे में
कितनी भी चिन्ता करें, परन्तु
क्या आपका चिनितत मन उस समस्या का समाधान
कर सकता है ?
12. समय ही जीवन है । समय को बरबाद
करना अपने जीवन को बरबाद करने के समान
है।
13. किसी दुसरे व्यक्ति की आलोचना करने से
पहले हमे अपने अन्दर झांक कर देख
लेना चाहिए ।
14. लोभ को जीतने का प्रयास करे,
क्योंकि "मानव जब बूढ़ा भयो, तृष्णा भई जवान" ।
15. जब कोई व्यक्ति परमात्मा को आत्म-समर्पण
करता है, तो वह अपना मन ईश्वर की और
लगाकर उसी की श्रीमत को सुनता है तथ
उसी के अनुरूप कर्म करता है ।
16. हम सितारों की दुरी तथा समुद्र
की गहराई का अन्वेषण करते है , परन्तु
हम कोंन है तथा इस संसार में क्यों आये है, इस विषय
में कितना जानते है?
17. कभी-कभी हम दूसरों को बदलने के लिये बाध्य
कर देते है, क्योंकि हम चाहते है कि वे वेसे
ही बने, जैसा हम चाहते है ।
18. किसी भी चीज को समझने के लिए ज्ञान
की आवश्यकता होती हिया किन्तु उसे महसूस
करने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है ।
19. एक बार आपको कुछ न करने की आदत पड़ जाये
तो आप पायेंगे कि व्यस्त होने के लिए समय
नहीं बचता ।
20. दर्पण में आप अपना चेहरा देख सकते है,
चरित्र नहीं ।
की दूसरी की साथ तुलना करते रहते हैं तो आप
अवश्य ही अहंकार अथवा र्इष्र्या के शिकार
हो जायेंगे ।
2. अच्छी पुस्तकें अच्छे साथी की तरह हैं ।
अश्लील सहित्य हमारे मन को दूषित
करता है तथा हमें गलत रास्ते की ओर अग्रसर
करता है ।
3. समस्यायें चाहे कैसी भी हों, परन्तु इनसे घबराइये
मत, बलिक इन्हें परीक्षा समझ कर पास
कीजिये ।
4. जीवन को आबाद करना है तो मैं कौन हूं ? इस
पहेली को हल कीजिये । मैं और मेरे-पन के भान से
मुक्त हो जाइये ।
5. ज्ञान सबसे बड़ा धन है । स्वयं से पूछें - ''मैं
कितना धनवान हूं ?
6. यदि आपके मुख से गन्दे बोल निकलते
हैं तो आपका मन कैसा होगा ?
7. हमारे वचन चाहे कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हों,
दुनिया हमें हमारे कर्मों के द्वारा पहचानती है
।
8. यदि आप मत्यु से भयभीत होते हैं तो इसका अर्थ
यह है कि आप जीवन का महत्व ही नहीं समझते
।
9. आप अपने अधिकारों के प्रति ही जागरुक न
रहें अपितु इस बात का भी ध्यान रखें
कि आप सही मार्ग पर हैं या नहीं ।
10. अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से
आपमें अहंकार आ सकता है, परन्तु आध्यातिमक
ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते हैं
उतनी नम्रता आती है ।
11. आप किसी समस्या के बारे में
कितनी भी चिन्ता करें, परन्तु
क्या आपका चिनितत मन उस समस्या का समाधान
कर सकता है ?
12. समय ही जीवन है । समय को बरबाद
करना अपने जीवन को बरबाद करने के समान
है।
13. किसी दुसरे व्यक्ति की आलोचना करने से
पहले हमे अपने अन्दर झांक कर देख
लेना चाहिए ।
14. लोभ को जीतने का प्रयास करे,
क्योंकि "मानव जब बूढ़ा भयो, तृष्णा भई जवान" ।
15. जब कोई व्यक्ति परमात्मा को आत्म-समर्पण
करता है, तो वह अपना मन ईश्वर की और
लगाकर उसी की श्रीमत को सुनता है तथ
उसी के अनुरूप कर्म करता है ।
16. हम सितारों की दुरी तथा समुद्र
की गहराई का अन्वेषण करते है , परन्तु
हम कोंन है तथा इस संसार में क्यों आये है, इस विषय
में कितना जानते है?
17. कभी-कभी हम दूसरों को बदलने के लिये बाध्य
कर देते है, क्योंकि हम चाहते है कि वे वेसे
ही बने, जैसा हम चाहते है ।
18. किसी भी चीज को समझने के लिए ज्ञान
की आवश्यकता होती हिया किन्तु उसे महसूस
करने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है ।
19. एक बार आपको कुछ न करने की आदत पड़ जाये
तो आप पायेंगे कि व्यस्त होने के लिए समय
नहीं बचता ।
20. दर्पण में आप अपना चेहरा देख सकते है,
चरित्र नहीं ।


