खास है नवरात्र, एक-दो नहीं बन रहे हैं चार विशेष संयोग!
Posted by Anonymous | Sunday, March 30, 2014 | Posted in dharm
भोपाल। आज से शुरू हुए मां दुर्गा की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र के मौके पर सुबह से ही मंदिरों में खासी भीड़ देखने को मिली। शुभ फल प्राप्ति के लिहाज से यह नवरात्रा बहुत ही खास मानी जा रही है। विशेष पूजा अर्चना करने के साथ ही भक्त व्रत रखकर देवी मां को प्रसन्न कर रहे हैं। शहर के सभी देवालयों में नवरात्र पर्व की विशेष तैयारियां की गई है और देवालयों में विधि विधान से जवारे बोए गए हैं।
शहर की कफ्र्यू वाली माता मंदिर, शाहजहांनाबाद दुर्गा मंदिर, तलैया स्थित काली मंदिर, टीटी नगर स्थित माता मंदिर, सिंधी कालोनी, हमीदिया रोड स्थित दुर्गा मंदिर और विधायक विश्रामगृह स्थित मां चामुंडा दरबार सहित शहर के अन्य माता मंदिरों में विशेष सजावट की गई है।
मां भगवती की 9 शक्तियों की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्र में इस बार चार सर्वसिद्ध योग बन रहे हैं। ये देवी उपासना और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए बेहद अहम रहेंगे। नवरात्र में इस बार बन रहे चार विशेष संयोग में भक्त देवी साधना के साथ ही पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार एक अप्रैल को सर्वार्थ सिद्ध योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। वहीं 8 अप्रैल को रामनवमी के दिन पुण्य नक्षत्र का योग है। ऐसी मान्यता है कि पुण्य नक्षत्र के दौरान की गई पूजा अर्चना का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है वहीं खरीदी भी शुभ मानी जाती है। इसी दिन सुकर्मा योग भी बन रहा है, जबकि भगवान श्रराम का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाएगा। इससे नवमी पर पूजन और अनुष्ठान का खास फल मिलेगा।
ऐसी एकादशी जिसके पुण्य से पिशाच योनी में जाना नहीं पड़ता है।
Posted by Unknown | Thursday, February 20, 2014 | Posted in dharm
इस व्रत के पुण्य से व्यक्ति को पिशाच योनी से भी मुक्ति मिल जाती है। इस संदर्भ में एक कथा का उल्लेख किया गया है कि इन्द्र की सभा में एक गंधर्व गीत गा रहा था। परन्तु उसका मन अपनी प्रिया को याद कर रहा था। इस कारण से गाते समय उसकी लय बिगड गई। इस पर इन्द्र ने क्रोधित होकर गंधर्व और उसकी पत्नी को पिशाच योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया।
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पिशाच योनी में जन्म लेकर पति पत्नी कष्ट भोग रहे थे। संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन दुःखों से व्याकुल होकर इन दोनों ने कुछ भी नहीं खाया और रात में ठंढ की वजह से सो भी नहीं पाये। इस तरह अनजाने में इनसे जया एकादशी का व्रत हो गया।
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इस व्रत के प्रभाव से दोनों श्राप मुक्त हो गये और पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में लौटकर स्वर्ग पहुंच गये। देवराज इन्द्र ने जब गंधर्व को वापस इनके वास्तविक स्वरूप में देखा तो हैरान हुए। गन्धर्व और उनकी पत्नी ने बताया कि उनसे अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के पुण्य से ही उन्हें पिशाच योनी से मुक्ति मिली है।
शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत के दिन पवित्र मन से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। मन में द्वेष, छल-कपट, काम और वासना की भावना नहीं लानी चाहिए। नारायण स्तोत्र एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार से जया एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
जो लोग इस एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं वह भी आज के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें और जरुरतमंदों की सहायता करें तो इससे भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान भोलेनाथ को आखिर भांग धतूरा क्यों पसंद है?
Posted by Unknown | | Posted in dharm
इसके पीछे पुराणों में जहां धार्मिक कारण बताया गया है वहीं इसका वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो भगवान शिव को कैलाश पर्वत पर रहने वाला बताया गया है।
यह अत्यंत ठंडा प्रदेश है जहां ऐसे आहार और औषधि की जरुरत होती है जो शरीर को गर्माहट प्रदान करे। वैज्ञानिक दृष्टि से भांग और धतूरा सीमित मात्रा में लिया जाए तो औषधि का काम करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है।
शिव जी के भंग खाने का धार्मिक कारण
जबकि धार्मिक दृष्टि से इसका कारण देवी भागवत पुराण में बतया गया है। इस पुराण के अनुसार शिव जी ने जब सागर मंथन से निकले हालाहल विष को पी लिया तब वह व्याकुल होने लगे।
तब अश्विनी कुमारों ने भांग, धतूरा, बेल आदि औषधियों से शिव जी की व्याकुलता दूर की। उस समय से ही शिव जी को भांग धतूरा प्रिय है। जो भी भक्त शिव जी को भांग धतूरा अर्पित करता है, शिव जी उस पर प्रसन्न होते हैं।
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Posted by Unknown | Saturday, December 28, 2013 | Posted in dharm
साल की अंतिम एकादशी
Posted by Unknown | Friday, December 27, 2013 | Posted in dharm
यह एकादशी अपने नाम के अनुसार मनोकामना सफल करने वाली एकादशी है। पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति विधिवत रूप से इस एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करता है उसे वर्षों तक तपस्या करने का पुण्य प्राप्त होता है।
पद्म पुराण में सफला एकादशी व्रत के महात्म्य का वर्णन मिलता है। भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया है कि सफला एकादशी व्रत के देवता श्री नारायण हैं। जो व्यक्ति सफला एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है।
रात्रि में जागरण करते हैं ईश्वर का ध्यान और श्री हरि के अवतार एवं उनकी लीला कथाओं का पाठ करता है उनका व्रत सफल होता है। इस प्रकार से सफला एकादशी का व्रत करने वाले पर भगवान प्रसन्न होते हैं। व्यक्ति के जीवन में आने वाले दुःखों को पार करने में भगवान सहयोग करते हैं। जीवन का सुख प्राप्त कर व्यक्ति मृत्यु के पश्चात सद्गति को प्राप्त होता है।
सफला एकादशी की कथा
पद्म पुराण में सफला एकादशी की जो कथा मिलती है उसके अनुसार महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।
शुभ -विचार
Posted by Unknown | Thursday, December 19, 2013 | Posted in dharm
की दूसरी की साथ तुलना करते रहते हैं तो आप
अवश्य ही अहंकार अथवा र्इष्र्या के शिकार
हो जायेंगे ।
2. अच्छी पुस्तकें अच्छे साथी की तरह हैं ।
अश्लील सहित्य हमारे मन को दूषित
करता है तथा हमें गलत रास्ते की ओर अग्रसर
करता है ।
3. समस्यायें चाहे कैसी भी हों, परन्तु इनसे घबराइये
मत, बलिक इन्हें परीक्षा समझ कर पास
कीजिये ।
4. जीवन को आबाद करना है तो मैं कौन हूं ? इस
पहेली को हल कीजिये । मैं और मेरे-पन के भान से
मुक्त हो जाइये ।
5. ज्ञान सबसे बड़ा धन है । स्वयं से पूछें - ''मैं
कितना धनवान हूं ?
6. यदि आपके मुख से गन्दे बोल निकलते
हैं तो आपका मन कैसा होगा ?
7. हमारे वचन चाहे कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हों,
दुनिया हमें हमारे कर्मों के द्वारा पहचानती है
।
8. यदि आप मत्यु से भयभीत होते हैं तो इसका अर्थ
यह है कि आप जीवन का महत्व ही नहीं समझते
।
9. आप अपने अधिकारों के प्रति ही जागरुक न
रहें अपितु इस बात का भी ध्यान रखें
कि आप सही मार्ग पर हैं या नहीं ।
10. अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से
आपमें अहंकार आ सकता है, परन्तु आध्यातिमक
ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते हैं
उतनी नम्रता आती है ।
11. आप किसी समस्या के बारे में
कितनी भी चिन्ता करें, परन्तु
क्या आपका चिनितत मन उस समस्या का समाधान
कर सकता है ?
12. समय ही जीवन है । समय को बरबाद
करना अपने जीवन को बरबाद करने के समान
है।
13. किसी दुसरे व्यक्ति की आलोचना करने से
पहले हमे अपने अन्दर झांक कर देख
लेना चाहिए ।
14. लोभ को जीतने का प्रयास करे,
क्योंकि "मानव जब बूढ़ा भयो, तृष्णा भई जवान" ।
15. जब कोई व्यक्ति परमात्मा को आत्म-समर्पण
करता है, तो वह अपना मन ईश्वर की और
लगाकर उसी की श्रीमत को सुनता है तथ
उसी के अनुरूप कर्म करता है ।
16. हम सितारों की दुरी तथा समुद्र
की गहराई का अन्वेषण करते है , परन्तु
हम कोंन है तथा इस संसार में क्यों आये है, इस विषय
में कितना जानते है?
17. कभी-कभी हम दूसरों को बदलने के लिये बाध्य
कर देते है, क्योंकि हम चाहते है कि वे वेसे
ही बने, जैसा हम चाहते है ।
18. किसी भी चीज को समझने के लिए ज्ञान
की आवश्यकता होती हिया किन्तु उसे महसूस
करने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है ।
19. एक बार आपको कुछ न करने की आदत पड़ जाये
तो आप पायेंगे कि व्यस्त होने के लिए समय
नहीं बचता ।
20. दर्पण में आप अपना चेहरा देख सकते है,
चरित्र नहीं ।
खर मास आज से: करें इस मंत्र का जप, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु
Posted by Unknown | Sunday, December 15, 2013 | Posted in dharm
धर्म ग्रंथों में ऐसे कई श्लोक भी वर्णित है जिनका जप यदि खर मास में किया जाए तो अतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। प्राचीन काल में श्रीकौण्डिन्य ऋषि ने यह मंत्र बताया था। मंत्र जप किस प्रकार करें इसका वर्णन इस प्रकार है-
श्रीरामचरित मानस के इन उपायों से हनुमानजी करते हैं मालामाल
Posted by Unknown | Thursday, December 5, 2013 | Posted in dharm
यहां कुछ ऐसी चौपाइयां बताई जा रही हैं जिनके जप से आप बहुत ही जल्द अपनी किस्मत चमका सकते हैं और पैसों की तंगी से मुक्ति पा सकते हैं। इन चौपाइयों से आपको श्रीराम की कृपा मिलेगी साथ ही हनुमानजी भी आपकी परेशानियों को दूर करेंगे...
'शंकराचार्य पर आरोप लगाने वालों की हो जांच'
Posted by Unknown | Thursday, November 28, 2013 | Posted in dharm
- तिरुवनंतपुरम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक और भारतीय विचारकेंद्रम के निदेशक पी. परमेश्वरन ने कांची के दशकों पुराने शंकर मठ और शंकराचार्य के खिलाफ साजिश करने वाले लोगों के खिलाफ जांच की मांग की है। परमेश्वरन की ओर से आज जारी एक बयान में कहा गया कि कांची कामकोटि पीठ शंकराचार्य के खिलाफ साजिश करने वाला चाहे कोई भी हो, कितना भी शक्तिशाली हो उस पर मामला चलाकर उसे दंडित किया जाना चाहिए।
- परमेश्वरन ने कहा कि इससे भविष्य में फिर कोई भी आध्यात्मिक संस्थाओं और आचार्यों पर इस तरह के इल्जाम लगाने का दुस्साहस नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि जयेंद्र सरस्वती सहित जिन लोगों पर हत्या के आरोप थे, उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया है। यह न केवल मठ बल्कि मठ पर आस्था रखने वाले लाखों श्रद्धालुओं और हिंदू समाज के लिए राहत की बात है।
धार्मिक व्यक्ति की पहचान दान या कुछ और
Posted by Unknown | Tuesday, November 26, 2013 | Posted in dharm
आठवें दिन की देवी मां महागौरी
Posted by rahul thakur | Wednesday, October 9, 2013 | Posted in dharm
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया॥
नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है।
अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है इनको।
हिन्दू धर्म के दस पवित्र थलचर जंतु...
Posted by rahul thakur | | Posted in dharm
आओ जानने हैं ऐसे दस दिव्य और पवित्र थलचर जंतु जिनका हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व माना गया है और जिनका सम्मान और आदर करना प्रत्येक हिन्दू का कर्तव्य है।
हिंदू धर्म के उद्धारक या संहारक?
Posted by rahul thakur | | Posted in dharm
वैदिक काल में संत को ऋषि-मुनि कहा जाता था। ये सभी ऋषि या मुनि अरण्य या हिमालय में अपने-अपने आश्रम में रहकर तप करते थे। इसे तपोभूमि भी कहा जाता था। संसार से ये संत कटे हुए रहते थे और यम-नियम का पालन करते हुए कठित तप-योग करते थे। कुंभ या चातुर्मास के दौरान ही संत सांसारिक जीवन में आकर समाज के हाल-चाल जानते थे। इस दौरान संत लोगों से कुछ लेते नहीं थे बल्कि उन्हें कुछ देकर ही जाते थे। इसके अलावा जिन लोगों को दीक्षा देना होती उन्हें वे साथ लेकर चले जाते थे।
चार आश्रम को जानिए
हमारे ऋषि-मुनियों ने चार आश्रम की स्थापना की- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। ये आश्रम इसलिए स्थापित किए ताकि गृहस्थ और संन्यासी में फर्क किया जा सके, लेकिन आजकल गृहस्थ ही खुद को संन्यासी या संत मानने लगे हैं। वे सभी सुख-सुविधाओं के बीच रहकर उन्हें भोगते हुए खुद को संत या संन्यासी बताते हैं। लोग ऐसे तथाकथित संतों से दीक्षा लेकर उन्हें अपना गुरु मानते हैं। ये ऐसे गुरु घंटाल हैं कि लोगों को देते कुछ नहीं बल्कि लोगों के पास जो है उसे भी छीन लेते हैं। निर्मल बाबा दसवंत के नाम पर छीनते हैं तो आसाराम करोड़ों का दान लेकर।
नवरात्रि में शत्रु शमन के लिए क्या करें...
Posted by rahul thakur | | Posted in dharm
ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिद्वंद्विता कलियुग में सर्वत्र पाए जाने वाले दोष हैं जिनकी वजह से सज्जन मनुष्य प्राय: पीड़ित पाए जाते हैं। इनसे बचने के सरल एवं उपयोगी साधन मंत्र निम्नलिखित हैं जिनके प्रयोग से मनुष्य अपने कंटकाकीर्ण जीवन को सुखमय व सरल बना सकता है।












