Published On:Saturday, January 25, 2014
Posted by NJFI media
बोहरा समाज में विचित्र स्थिति
उज्जैन। 52 वे दाई डाॅ. सयदना ने बोहरा समाज को एकता समानता, सम्पन्नता, सम्मान,सहयोग व सेवा के परिवेश में रहा है। पंच तत्वां से बने जीवधारी को पंच तत्वों में विलीन होना नियति चक्र है। डाॅ. सैयदना अनंत यात्रा हेतु अन्र्तध्यान हुए। उनका पार्थिव शरीर खाके सुपर्द किया गया। 52 वे मौला की विदाई से बोहरा समाज गमगीन था। उनके मजार की मिट्टी सूखी ही नही थी कि खुजेमा कुतुबुद्धीन ने समाज में जहर घोला। स्वंय को 53 वां दाई व डाॅ. सयदना का उत्तराधिकारी घाषित किया। इस बात से बोहरा समाज में आक्रोश फैला। खुजेमा कुतुबद्धीन को जानकारी भेजी गए। 99 प्रतिशत बोहरा परिवार मफदलभाई को अपना 53 वां दाई व मौला स्वीकार कर चुका है। मफदलभाई में डा. सैयदना का नूर भी झलकता है। संगठित व एकता की मिसाल बोहरा समाज में 53 वे दाई को लेकर जो विदाई की स्थिति बनी है वह उचित नहीं है।
बोहरा समाज में अफवाहे भी फैलाई जा रही है की खुजेमा कुतबुद्धीन का निधन हो गया हैं बोहरा समाज प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन दे रहे है कि मफदल भाई मौला है वे ही 53 वे दाई हैं। बोहरा समाज को बिखरने के षडयंत्र भी अफवाहे फैलाकर रचे जा रहे हैं। स्व. डाॅ. सैयदना ने ही मफदल भाई को अपना उत्तराधिकारी 53 दाई के रूप में प्रस्तुत किया था। मफदल भाई ही मौला एवं 53 वे दाई हैं। खुजेमा कुतबुद्धीन का दावा ही सामाजिक व आध्यात्मिक अभिसमय के विपरीत हैं। देश की जनता खुजेमा कुतुबुद्धीन को सुझाव दे रही है कि वे बोहरा समाज की एकता व सम्मान की रक्षा हेतु अप्रिय कदम न उठाये। मफदलभाई के पक्ष में 99 प्रतिशत परिवार हैं।


