Published On:Friday, January 17, 2014
Posted by NJFI media
रूठे महाकाल भी कैलाश में
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की कुव्यवस्था लूट, ठगी, घिनौनेपन एवं भक्तों की फजीहत से रूठकर कैलाश पर्वत पर चले गए हैं महाकाल मंदिर शिखरों को स्वर्ण मण्डिल कर उसमें घोटाले कर दान अभिषेक प्रसाद व अन्य व्यवस्थाओं में भ्रष्टाचार, धनखोरी तथा व्हीआयपीवाद से नाराज महाकाल ने मंदिर परिसर ही त्याग दिया और कलाश पर चले गए। वे जब ही वापस आयेगे तब मंदिर व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी, ठगी धनखोरी भ्रष्टाचार आपाधापी, घिनौनापन समाप्त होगा, पावन आध्यात्मिक वातास व परिवेश होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो महाकाल मंदिर में पुनः वापस नहीं आयेगे शराब पीकर मंदिर में प्रवेश करने वालों की संख्या बढती जा रही हैं।
म.प्र. सरकार जिला प्रशासन महाकाल प्रबंध समिति पण्डे, पुजारी एवं सभी भक्त यदि महाकाल मंदिर में महाकाल का पुनः प्रवेश चाहते है तो अपना अपना कुचरित्र सुधारे और सुव्यवस्था स्थापित हो, मंदिर परिसर व क्षेत्र का वातावरण व परिवेश हो, तब ही महाकाल पुनः मंदिर में आयेगे अन्यथा कैलाश में ही रहेगे
हम सभी को शर्म आना चाहिए हम स्वंय महाकाल के साथ विश्वासघात व धोखाधडी कर रहे हैं।
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